चित्रकूट के मानिकपुर में महिला ने की आत्महत्या, उत्पीड़न और धमकी के आरोपों से जुड़ा मामला गहराया

चित्रकूट । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मानिकपुर कस्बे में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां किराए पर कमरा लेकर रह रही महिला ममता मिश्र ने आत्महत्या कर ली। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें लगातार उत्पीड़न, धमकियों और न्याय न मिलने के कारण यह कदम उठाना पड़ा। इस घटना से क्षेत्र में न्याय व्यवस्था, महिला सुरक्षा और एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बेटी को परेशान कर रहा था युवक, शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, ममता मिश्र की बेटी को मानिकपुर क्षेत्र का ही एक युवक, जो अनुसूचित जाति समुदाय से है, लगातार परेशान कर रहा था। परेशान होकर ममता मिश्र ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की और न ही छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज किया।

भाजपा मंडल अध्यक्ष पर लगाए गए गंभीर आरोप

परिजनों का कहना है कि इस पूरे मामले में स्थानीय राजनीति ने भी हस्तक्षेप किया। आरोप है कि भाजपा के मानिकपुर मंडल अध्यक्ष राकेश कोल ने न केवल मुकदमा दर्ज होने से रोका, बल्कि ममता मिश्र पर एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने की धमकी भी दी। इतना ही नहीं, उनसे आर्थिक लाभ लेने की कोशिश के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

धमकियों और दबाव से टूटी महिला, उठाया आत्मघाती कदम

करीबी लोगों का कहना है कि लगातार दबाव, सामाजिक अपमान और न्याय न मिलने की वजह से ममता मिश्र मानसिक रूप से टूट गई थीं। अंततः उन्होंने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया। घटना के बाद से पूरे इलाके में आक्रोश और आंसू का माहौल है।

सवालों के घेरे में पुलिस और प्रशासन

इस मामले ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होती और पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिलती, तो शायद यह दर्दनाक घटना टल सकती थी। अब लोगों की मांग है कि—

मंडल अध्यक्ष राकेश कोल पर कड़ी कार्रवाई हो।

थाना प्रभारी को बर्खास्त किया जाए।

निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाई जाए।

एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर फिर उठा सवाल

इस घटना ने एक बार फिर एससी/एसटी एक्ट के संभावित दुरुपयोग की बहस को तेज कर दिया है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक इस कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को डराया-धमकाया जाता रहेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि कानून का उद्देश्य सामाजिक न्याय है, लेकिन यदि इसका इस्तेमाल दबाव और उत्पीड़न के लिए होने लगे तो यह न्याय व्यवस्था पर कलंक बन सकता है।

निष्कर्ष

चित्रकूट का यह मामला केवल एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक दबाव और कानूनी प्रावधानों के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर पेश करता है। सवाल उठता है कि क्या प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी समय के साथ दब जाएगा।

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