
नाशिक, महाराष्ट्र। हरिहर किला, जिसे हरषगढ़ भी कहा जाता है, साहसिक पर्यटन और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यह किला नाशिक शहर से लगभग 40 किमी, इगतपुरी से 48 किमी और घोटी से 40 किमी की दूरी पर स्थित है। सेन वंश (9वीं–14वीं शताब्दी) के दौरान निर्मित इस किले को 1636 में त्र्यंबक और पुणे के अन्य किलों के साथ खान ज़माम को सौंप दिया गया था।
हरिहर किला अपनी अनोखी सीढ़ियों के लिए प्रसिद्ध है। पत्थर से तराशी गई यह सीढ़ी मात्र 1 मीटर चौड़ी और 60 मीटर ऊँची है, जिसमें कुल 117 पायदान बने हैं। चढ़ाई के दौरान यात्री को सबसे पहले मुख्य द्वार की शुरुआती सीढ़ियाँ पार करनी होती हैं और खड़ी ढलान वाले ओवरहैंग से गुजरना पड़ता है। इसके बाद खांचे वाली सीढ़ियाँ और फिर पत्थर के भीतर बनी सीढ़ियाँ आती हैं, जो सीधे किले के शीर्ष तक ले जाती हैं। रोमांच और इतिहास का संगम हरिहर किला नाशिक पर्यटन का अहम हिस्सा है।