राजस्थान के नसीराबाद का प्रसिद्ध 600 ग्राम का ‘कचौरा’ बना टूरिज्म और फूड लवर्स के लिए नई पहचान

राजस्थान की पारंपरिक डिशेज़ और स्ट्रीट फूड की बात हो और कचौरी का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। आपने अक्सर खस्ता और मसालेदार कचौरी खाई होगी, लेकिन क्या आपने कभी ‘कचौरा’ के बारे में सुना है? यह नाम सुनने में नया ज़रूर लगता है, लेकिन इसका जायका और आकार दोनों ही आपको हैरान कर देंगे।

राजस्थान के अजमेर जिले के पास स्थित एक छोटा शहर नसीराबाद अपने विशेष कचौरा के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां बनने वाला कचौरा न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है बल्कि वजन में भी भारी – लगभग 600 ग्राम का होता है। इसीलिए इसे लोग मज़ाक में ‘कचौरी का बाप’ भी कहते हैं।

क्या है नसीराबाद का कचौरा?

नसीराबाद का कचौरा पारंपरिक कचौरी से आकार और फ्लेवर में बिलकुल अलग होता है। यह मोटी, गोल और भरपूर मसालेदार स्टफिंग से भरी हुई होती है। स्थानीय मसालों और देसी घी से तैयार किया गया यह कचौरा हर उस व्यक्ति के लिए अनुभव है जो असली राजस्थानी स्ट्रीट फूड का दीवाना है।

फूड टूरिज्म को बढ़ावा

नसीराबाद का यह अनोखा कचौरा अब राजस्थान टूरिज्म का भी हिस्सा बनता जा रहा है। देशभर से पर्यटक, खासकर फूड व्लॉगर्स और यूट्यूबर्स, इसे चखने और इसका रिव्यू करने यहां पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर #कचौरी_का_बाप, #NasirabadKachaura जैसे हैशटैग्स के साथ यह तेजी से वायरल हो रहा है।

क्यों है खास?

वजन: करीब 600 ग्राम – एक व्यक्ति के लिए पूरा खाना

स्वाद: तीखे और देसी मसालों का गहरा मेल

खास पहचान: नसीराबाद की वर्षों पुरानी पारंपरिक रेसिपी

लोकप्रिय नाम: कचौरी का बाप


निष्कर्ष

अगर आप राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अजमेर से कुछ किलोमीटर दूर नसीराबाद का यह कचौरा जरूर ट्राय करें। यह न सिर्फ आपके स्वाद को एक नया अनुभव देगा, बल्कि राजस्थान के लोकल जायकों की विविधता को भी और गहराई से समझने का मौका देगा।

Exit mobile version