
पठानकोट । जहाँ आज के दौर में कई लोग अपार संपत्ति होने के बावजूद दूसरों की मदद से कतराते हैं, वहीं पठानकोट में एक दिव्यांग भिखारी ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। राजू नाम के इस भिखारी ने भीषण ठंड के बीच जरूरतमंदों को 500 गर्म कंबल बांटकर मानवता का संदेश दिया है।
पंजाब के पठानकोट शहर में रहने वाले दिव्यांग भिखारी राजू भिखारी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। खुद दूसरों से 10-10 रुपए की मदद मांगकर जीवन यापन करने वाले राजू ने महीनों तक छोटी-छोटी रकम जोड़कर 500 गर्म कंबलों की व्यवस्था की। इसके बाद उन्होंने ये कंबल सड़कों पर रहने वाले बेसहारा लोगों, बुजुर्गों और गरीब परिवारों में खुद जाकर वितरित किए।
राजू का कहना है, “मैं रोज़ लोगों से 10-10 रुपए मांगता हूं। उसी में से थोड़ा-थोड़ा बचाता गया। जब देखा कि ठंड में लोग ठिठुर रहे हैं, तो लगा कि कुछ करना चाहिए।”
दिव्यांग होने के बावजूद राजू का हौसला और जज़्बा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने न किसी संस्था से मदद ली, न किसी प्रचार की चाह रखी, बल्कि चुपचाप इंसानियत का फर्ज निभाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजू खुद बेहद साधारण जीवन जीते हैं, लेकिन दूसरों के दर्द को सबसे पहले समझते हैं। उनके इस कार्य ने यह साबित कर दिया कि दान और सेवा अमीरी की मोहताज नहीं होती, बल्कि दिल बड़ा होना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion):
दिव्यांग भिखारी राजू भिखारी का यह कदम समाज के लिए एक गहरी सीख है। 10-10 रुपए जोड़कर 500 कंबल बांटना केवल सहायता नहीं, बल्कि हमारी संवेदनाओं को जगाने वाली मिसाल है। पठानकोट की यह घटना बताती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है—बस उसे निभाने वाले सच्चे दिल चाहिए।



