अलीगढ़ में चार मीट व्यापारियों की पिटाई का वीडियो वायरल: अफवाह के चलते सरेआम दरिंदगी, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश। अलीगढ़ से सामने आया एक दिल दहला देने वाला वीडियो पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाला है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चार मीट व्यापारियों को भीड़ द्वारा बेरहमी से पीटा जा रहा है। घटना अलीगढ़ के पनैठी क्षेत्र की है, जहां एक अफवाह के आधार पर अकील, अरबाज, कदीम और एक अन्य अकील को जानवरों की तरह घेर कर पीटा गया। वीडियो में पीड़ितों की चीखें, टूटती हड्डियों की आवाज़ और दर्द से भरी कराह सुनकर रूह कांप जाती है।

भीड़ हिंसा और अफवाहों के खतरनाक परिणाम
घटना इस ओर इशारा करती है कि समाज में अफवाहों के आधार पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। न किसी कोर्ट का फैसला, न कोई सबूत — सिर्फ शक और अफवाह ने चार जिंदगियों को अधमरा कर दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पीड़ित मीट के वैध व्यापार से जुड़े हुए थे, लेकिन भीड़ ने बिना जांच-पड़ताल के उन्हें घेरकर अमानवीय तरीके से पीटा।

वीडियो वायरल, लेकिन प्रशासन की चुप्पी सवालों में
जिस वीडियो में यह पिटाई दिखाई दे रही है, वह 18+ कंटेंट की तरह डरावना और मानवता को शर्मसार करने वाला है। सवाल यह है कि इतने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन पर अब तक शासन-प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई? क्या पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा? क्या कानून अब भी ज़िंदा है?

क्या अल्पसंख्यक होना अपराध बन चुका है?
इस घटना ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, मानवाधिकारों और भीड़ तंत्र की मानसिकता पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। क्या हमारा समाज इतनी असहिष्णुता की ओर बढ़ चुका है कि अब कोई अफवाह किसी की जान लेने के लिए काफी है?

मानवाधिकार संगठनों और समाजसेवियों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे “Mob Lynching” यानी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारने की कोशिश बताया है। संगठनों ने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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