देश में फर्जी डॉक्टरों का जाल: 8 हजार से अधिक विदेशी MBBS डिग्रीधारी बिना वैध जांच कर रहे इलाज

नई दिल्ली । भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला और भयावह सच सामने आया है। देशभर में 8 हजार से अधिक ऐसे डॉक्टर सक्रिय पाए गए हैं, जिनके पास विदेश से प्राप्त MBBS डिग्री, फर्जी या संदिग्ध मेडिकल रजिस्ट्रेशन और बिना आवश्यक वैधता के मरीजों का इलाज करने का आरोप है। यह महज़ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सीधा अपराध और राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति है।
फर्जी MBBS डॉक्टर: लापरवाही नहीं, संगठित घोटाला
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार, कई विदेशी विश्वविद्यालयों से MBBS करने वाले उम्मीदवारों ने Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) या National Exit Test (NExT) जैसी अनिवार्य परीक्षाएं पास किए बिना ही खुद को डॉक्टर के रूप में रजिस्टर करवा लिया। सवाल यह है कि बिना वैध जांच और सत्यापन के मेडिकल रजिस्ट्रेशन कैसे संभव हुआ? यह पूरा मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मेडिकल काउंसिल, राज्य चिकित्सा परिषदों और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
मरीजों की जान से खिलवाड़
MBBS जैसी डिग्री सिर्फ एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि मानव जीवन की जिम्मेदारी है। जब बिना योग्यता और वैध प्रशिक्षण वाले लोग इलाज करते हैं, तो गलत दवाइयां, गलत सर्जरी और गलत सलाह सीधे मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फर्जी डॉक्टरों के कारण हजारों मरीजों की जान खतरे में पड़ चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई समग्र आकलन नहीं हुआ।
सबसे नुकीला सवाल: जिम्मेदार कौन?
अब सवाल बेहद स्पष्ट और तीखा है इन फर्जी डॉक्टरों को रजिस्टर किसने किया? किसकी मिलीभगत से मेडिकल रजिस्ट्रेशन हुआ? अब तक जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई? क्या यह सिर्फ कागज़ी गड़बड़ी है या सिस्टम के भीतर गहरा भ्रष्टाचार?
सिस्टम क्या कर रहा है?
MBBS को देश में सबसे प्रतिष्ठित और कठिन डिग्रियों में गिना जाता है, लेकिन अगर इसी पद पर फर्जीवाड़ा फलने लगे, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है। स्वास्थ्य मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और राज्य सरकारों को अब सिर्फ जांच के आदेश नहीं, बल्कि कड़ी कार्रवाई, रजिस्ट्रेशन रद्दीकरण और आपराधिक मुकदमे चलाने होंगे।
निष्कर्ष
यह मामला किसी एक राज्य या एक विभाग का नहीं, बल्कि पूरे देश की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर संकट है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का भरोसा चिकित्सा व्यवस्था से पूरी तरह टूट सकता है।
अब सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ या नहीं, बल्कि यह है कि देश की जान की कीमत पर चुप्पी क्यों?




