धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित एक कॉलेज से सामने आई यह घटना देश के शिक्षा तंत्र को कठघरे में खड़ा करती है। द्वितीय वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा पल्लवी ने करीब दो महीने से अधिक समय तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार उसकी सांसें थम गईं। पल्लवी कथित तौर पर अपने ही कॉलेज की कुछ छात्राओं और एक प्रोफेसर द्वारा की गई बेरहम रैगिंग की शिकार थी।
कांपती आवाज़ में बयां किया था डर
परिजनों के अनुसार, पल्लवी ने घटना के बाद अपनी कांपती आवाज़ में उस भय और मानसिक यातना को साझा किया था, जिससे वह रोज़ गुजर रही थी। छात्रा ने बताया था कि उसके साथ न केवल शारीरिक मारपीट की गई, बल्कि उसे डराया-धमकाया गया और अश्लील हरकतों का भी सामना करना पड़ा। लगातार अपमान और डर ने पल्लवी को अंदर से तोड़ दिया।
कॉलेज की छात्राओं और प्रोफेसर पर आरोप
पल्लवी की मौत के बाद परिजनों ने धर्मशाला कॉलेज की तीन छात्राओं और एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर छात्रा को लंबे समय तक प्रताड़ित किया। रैगिंग के नाम पर की गई इस क्रूरता ने पल्लवी को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना कमजोर कर दिया कि वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई।
दो महीने तक अस्पताल में चला इलाज
घटना के बाद पल्लवी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए, जहां वह दो महीने से अधिक समय तक भर्ती रही। डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किए, लेकिन अत्यधिक तनाव, डर और मानसिक आघात ने उसकी जान ले ली।
रैगिंग पर फिर उठे सवाल
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि रैगिंग जैसी अमानवीय प्रथा आज भी देश के कई शिक्षण संस्थानों में जिंदा है। कानून, एंटी-रैगिंग कमेटियां और दिशा-निर्देश होने के बावजूद ऐसी घटनाओं का सामने आना सिस्टम की नाकामी को दर्शाता है।
न्याय की मांग
पल्लवी की मौत से गुस्साए परिजन और स्थानीय लोग आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन पर हैं कि क्या दोषियों को सख्त सजा मिलेगी या एक और छात्रा की मौत फाइलों में दफन होकर रह जाएगी।
रैगिंग ने ली 19 वर्षीय पल्लवी की जान: दो महीने तक मौत से जूझती रही छात्रा, कॉलेज की छात्राओं और प्रोफेसर पर गंभीर आरोप
