राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से 16 शहरों और 8 केंद्रीय जेलों में चल रहे हथकरघा केंद्र

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आचार्य समय सागर महाराज ने स्वदेशी और स्वावलंबन का संदेश दिया। आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से 16 शहरों और 8 केंद्रीय जेलों में हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं।

भोपाल। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज ने स्वदेशी अपनाने और स्वावलंबी बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के मार्गदर्शन और प्रेरणा से शुरू हुई हथकरघा प्रशिक्षण योजना का उद्देश्य भारत के स्वाभिमान को मजबूत करना और गांव-गांव तक स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता का संदेश पहुंचाना है।

इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज ने संघ के श्रमदान कार्य का अवलोकन भी किया। मुख्य ब्रह्मचारी गौरव भैया ने उन्हें हथकरघा सेवा और प्रशिक्षण केंद्रों की गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम में ट्रस्ट अध्यक्ष पंकज जैन, मनोज बांगा, राकेश (ओएसडी) सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

16 शहरों और 8 केंद्रीय जेलों में संचालित हो रहे केंद्र

प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से वर्तमान में मुंबई, कुंडलपुर, अशोकनगर, बीना, बारां सहित देश के 16 शहरों तथा तिहाड़ (दिल्ली), आगरा, मथुरा, वाराणसी, साबरमती, सूरत समेत 8 केंद्रीय जेलों में हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

उच्च शिक्षित युवाओं ने छोड़ी प्रतिष्ठित नौकरियां

उन्होंने बताया कि लगभग 25 उच्च शिक्षित ब्रह्मचारी इन केंद्रों का संचालन कर रहे हैं। इनमें कई युवाओं ने प्रतिष्ठित नौकरियां और आकर्षक करियर छोड़कर हथकरघा सेवा का मार्ग चुना।

बताया गया कि ब्रह्मचारी अमित भैया (एम.टेक. गोल्ड मेडलिस्ट) ने अमेरिका की एक कंपनी का लगभग 2 करोड़ रुपये के पैकेज वाला अवसर छोड़कर इस सेवा से जुड़े।

ब्रह्मचारी मनीष भैया ने आईआईटी (बीएचयू) से शिक्षा प्राप्त करने के बाद मारुति सुजुकी में मुख्य इंजीनियर का पद छोड़ा।

ब्रह्मचारी गौरव भैया संस्कृत में एम.ए. और एम.फिल. गोल्ड मेडलिस्ट हैं तथा केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक रह चुके हैं।

ब्रह्मचारी सुलभ भैया ने सीए की शिक्षा प्राप्त करने के बाद इस सेवा कार्य को अपनाया।

स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर

कार्यक्रम में कहा गया कि हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इस अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और युवाओं को इससे जोड़ने का आह्वान किया गया।

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