West Central Railway के तहत आने वाले रेलखंडों में सुरक्षा और परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए भारतीय रेल ने 665 करोड़ रुपये से अधिक की सिग्नलिंग आधुनिकीकरण परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इन परियोजनाओं के तहत 43 रेलवे स्टेशनों पर पुरानी पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदला जाएगा, जबकि ट्रैक मॉनिटरिंग के लिए मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) जैसी उन्नत तकनीक लगाई जाएगी।
रेल विशेषज्ञ इसे केवल तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के “सुरक्षित और स्मार्ट नेटवर्क” की दिशा में बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
भोपाल मंडल को क्या मिलेगा?
Bhopal Railway Division के बीना–रूठियाई रेलखंड के 17 स्टेशनों पर MSDAC प्रणाली स्थापित करने के लिए लगभग 44.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
इन स्टेशनों में महादेवखेड़ी, सेमरखेड़ी, मूंगावली, अशोकनगर, गुना और महुगढ़ा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं।
यह तकनीक ट्रैक पर ट्रेन की उपस्थिति और मूवमेंट की अधिक सटीक निगरानी करेगी, जिससे दुर्घटना की आशंका कम होगी और ट्रेन संचालन अधिक सुचारु हो सकेगा।
क्या होती है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग?
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार इंटरलॉकिंग प्रणाली किसी स्टेशन या रेलखंड पर सिग्नल और ट्रैक मूवमेंट को नियंत्रित करती है ताकि दो ट्रेनों के बीच टकराव जैसी स्थिति न बने।
पुरानी पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अधिक तेज, विश्वसनीय और कम मानवीय त्रुटियों वाली मानी जाती है।
यह सिस्टम कंप्यूटर आधारित नियंत्रण पर काम करता है और जटिल रेल नेटवर्क में ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद करता है।
MSDAC क्यों है महत्वपूर्ण?
MSDAC यानी मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर ट्रैक पर गुजरने वाले पहियों की गिनती के आधार पर यह तय करता है कि रेलखंड खाली है या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक ट्रैक सर्किट की तुलना में यह प्रणाली अधिक विश्वसनीय होती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मौसम, धूल या तकनीकी व्यवधान ट्रैक सर्किट को प्रभावित कर सकते हैं।
इससे सिग्नल फेलियर कम होंगे और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आने की संभावना है।
किन रेलखंडों में होगा सबसे बड़ा बदलाव?
परियोजनाओं के तहत:
Itarsi–Jabalpur Rail Section के 19 स्टेशनों पर लगभग 271.31 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और MSDAC प्रणाली स्थापित की जाएगी।
Jabalpur–Manikpur Rail Section के 24 स्टेशनों पर 393.83 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है।
ये दोनों रेलखंड माल और यात्री ट्रैफिक के लिहाज से अत्यंत व्यस्त माने जाते हैं।
“कवच” और स्मार्ट रेलवे नेटवर्क की दिशा में कदम
भारतीय रेलवे पहले से कई हाई डेंसिटी रूट्स पर Kavach, ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल जैसी तकनीकों पर काम कर रहा है।
कवच प्रणाली विशेष रूप से ट्रेन टक्कर रोकने वाली स्वदेशी सुरक्षा तकनीक के रूप में विकसित की गई है। सिग्नलिंग अपग्रेड को इसी व्यापक आधुनिकीकरण मिशन का हिस्सा माना जा रहा है।
यात्रियों और रेलवे को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद:
ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी
सिग्नल फेलियर कम होंगे
लाइन क्षमता में सुधार होगा
ट्रेनों की औसत गति बढ़ सकती है
रखरखाव लागत कम होगी
व्यस्त रूटों पर ट्रेनों का संचालन अधिक समयबद्ध होगा
विशेष रूप से मालगाड़ियों और लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए यह सुधार महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देरी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
भारतीय रेलवे का बदलता चेहरा
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे केवल नई ट्रेनों और स्टेशनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बैकएंड सुरक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से निवेश किया गया है।
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दशक में रेलवे की प्रतिस्पर्धा केवल सड़क और हवाई परिवहन से नहीं होगी, बल्कि “सुरक्षित, समयबद्ध और तकनीक आधारित परिवहन नेटवर्क” बनाने की होगी।
पश्चिम मध्य रेलवे में शुरू हुई ये परियोजनाएं उसी बड़े परिवर्तन की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।
पश्चिम मध्य रेलवे में सिग्नलिंग का बड़ा अपग्रेड: 43 स्टेशनों पर ₹665 करोड़ की परियोजनाएं, ट्रेनों की सुरक्षा और गति दोनों बढ़ेंगी
