नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में निर्दोष नागरिकों की जान जाने के बाद एक बार फिर से राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात का नाम सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्टों में नलिन प्रभात को कई पुराने आतंकी और नक्सली घटनाओं से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी भूमिका और गृह मंत्रालय की नियुक्ति नीति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पहलगाम आतंकी हमला और मौजूदा भूमिका
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले में कई नागरिकों की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। नलिन प्रभात इस समय जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
इतिहास में कई बार आतंकवाद और नक्सलवाद से टकराव का अनुभव
पुलवामा हमला (2019): इस आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। नलिन प्रभात उस समय सीआरपीएफ में एक वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे, हालांकि इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी और जांच एनआईए द्वारा की गई थी।
बीजापुर नक्सली हमला (2021): इस माओवादी हमले में 24 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। नलिन प्रभात उस दौरान छत्तीसगढ़ क्षेत्र में आईजी पद पर तैनात थे।
दंतेवाड़ा हमला (2010): इस घटना में 76 जवान शहीद हुए थे। उस समय प्रभात सीआरपीएफ के डीआईजी पद पर तैनात थे। रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय कुछ प्रशासनिक समीक्षा भी हुई थी, लेकिन कोई सार्वजनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई।
प्रॉपर्टी और पदोन्नति को लेकर सवाल
कुछ रिपोर्टों के अनुसार नलिन प्रभात ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश के मनाली में एक महंगी संपत्ति खरीदी है, और उनके नाम चंडीगढ़ में भी संपत्ति होने का दावा किया गया है। हालांकि इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह जानकारी अब तक सार्वजनिक रजिस्ट्रियों या मंत्रालय द्वारा साझा नहीं की गई है।
सरकारी दृष्टिकोण और पदस्थापन
गृह मंत्रालय द्वारा नलिन प्रभात को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना उनके सेवा अनुभव और आतंकवाद-नक्सलवाद से निपटने की विशेषज्ञता पर आधारित बताया जाता है। उनके खिलाफ किसी न्यायिक जांच या सजा की आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है।
निष्कर्ष:
जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और अधिकारियों की नियुक्ति हमेशा चर्चा का विषय रही है। नलिन प्रभात जैसे अधिकारियों की भूमिका, अतीत के संदर्भ में भले ही बहस का मुद्दा हो, परंतु अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से ही तय होती है।
जम्मू-कश्मीर DGP नलिन प्रभात को लेकर फिर उठे सवाल, एक से अधिक आतंकी हमलों और नक्सली घटनाओं से रहा है नाम जुड़ा
