नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे सिंधु नदी जल विवाद पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। देश के जाने-माने संत शंकराचार्य ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान जाने से रोकना कोई आसान काम नहीं है। शंकराचार्य का कहना है कि इस प्रक्रिया में कम से कम 20 साल लगेंगे और इसके लिए सरकार को लाखों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि भारत सरकार और तथाकथित गोदी मीडिया मिलकर देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि सिंधु नदी का पानी रोक दिया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऐसा करने में वर्षों लगेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि “सरकार जनता को मूर्ख बना रही है या फिर शंकराचार्य झूठ बोल रहे हैं?”
दरअसल, सिंधु जल संधि 1960 के तहत भारत सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के जल का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को जाने देता है। इस संधि को बदलना या उसे चुनौती देना एक जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसमें भारी निवेश, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार भी, सिंधु नदी का पानी पूरी तरह रोकने में कम से कम दो दशक लग सकते हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि सरकार सिर्फ घोषणाओं और मीडिया प्रचार के जरिए जनता को खुशफहमी में डाल रही है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। इस बयान के बाद देश में सरकार बनाम शंकराचार्य विवाद गहरा गया है और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से भारत-पाकिस्तान जल विवाद और सिंधु जल संधि के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने में लगेंगे 20 साल, सरकार कर रही जनता को गुमराह: शंकराचार्य का बड़ा बयान
