मेरे पास SC/ST एक्ट नाम का ब्रह्मास्त्र है, जाट या ब्राह्मण को चाहूं तो बर्बाद कर दूंगा, वीडियो वायरल

SC/ST एक्ट पर विवादित बयान से मचा हंगामा: कानून के दुरुपयोग के आरोपों पर फिर छिड़ी बहस
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर सामने आए एक आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान ने एक बार फिर अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी है। बयान में कानून को SC/ST एक्ट नाम का ब्रह्मास्त्र बताते जाट या ब्राह्मण को चाहूं तो बर्बाद कर दूंगा। सवर्णों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने और बिना जांच तत्काल गिरफ्तारी का दावा किया गया। इस बयान के बाद सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और प्रशासनिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
क्या है पूरा विवाद?
वायरल बयान में दावा किया गया कि SC/ST एक्ट के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराकर किसी भी व्यक्ति को फंसाया जा सकता है, उसकी जिंदगी बर्बाद की जा सकती है और 24 घंटे में गिरफ्तारी हो जाती है। बयान में विशेष जातियों का नाम लेकर धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया जा रहा है।
कानून क्या कहता है?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि SC/ST एक्ट का उद्देश्य अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों को उत्पीड़न, भेदभाव और हिंसा से सुरक्षा देना है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, कानून के तहत कार्रवाई के लिए प्रारंभिक तथ्यों का परीक्षण, प्राथमिकी की वैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक निगरानी जरूरी है। यह कहना कि “ना जांच होगी, ना पड़ताल” पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।
दुरुपयोग बनाम संरक्षण की बहस
यह सच है कि समय-समय पर कानून के दुरुपयोग के आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन न्यायपालिका ने संतुलन बनाए रखने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि झूठे और दुर्भावनापूर्ण मामलों में कार्रवाई हो सकती है। वहीं, सामाजिक संगठनों का कहना है कि दुरुपयोग के आरोपों के नाम पर कानून को कमजोर करना पीड़ितों के अधिकारों पर हमला है।
प्रशासन और समाज की प्रतिक्रिया
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस तरह के भड़काऊ बयानों पर निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि जाति के नाम पर धमकी या नफरत फैलाने वाले बयान सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाते हैं।





