नई दिल्ली। खालिस्तान समर्थक और सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक चौंकाने वाले बयान में स्वीकार किया है कि खालिस्तान आंदोलन पूरी तरह पाकिस्तान के समर्थन पर निर्भर है। उन्होंने यह भी माना कि उनके पास अपने पाकिस्तानी आकाओं की बात मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
पाकिस्तान और कनाडा से मिलती है पूरी मदद
गुरपतवंत पन्नू ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान और कनाडा की मदद के बिना खालिस्तान आंदोलन संभव ही नहीं है। खालिस्तान आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उकसाने और प्रचारित करने के पीछे मुख्य भूमिका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और कुछ कनाडाई राजनीतिक नेताओं की रही है।
खालिस्तान समर्थकों की हकीकत उजागर
विशेषज्ञों का मानना है कि गुरपतवंत पन्नू का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि खालिस्तानी एजेंडा अब एक विदेशी प्रायोजित प्रोपेगेंडा बन चुका है, जो भारत की एकता और अखंडता को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
इतिहासकारों और सिख समुदाय के बुद्धिजीवियों का कहना है कि लाहौर जो एक समय महाराजा रणजीत सिंह की राजधानी और सिख संस्कृति का केंद्र हुआ करता था, आज वहाँ सिखों की उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है। लाहौर जैसे ऐतिहासिक स्थल पर सिख पहचान खत्म हो जाना ही इस बात का प्रमाण है कि खालिस्तानी एजेंडे का सिख विरासत से कोई वास्तविक संबंध नहीं है।
पननू और उनके सहयोगी नेताओं की आलोचना तेज
पन्नू के इस स्वीकारोक्ति के बाद कनाडा में खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह जैसे नेताओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जो खालिस्तानी आंदोलन का परोक्ष या अपरोक्ष समर्थन करते हैं। भारतीय समुदाय में इन नेताओं की राजनीतिक नीयत और पारदर्शिता को लेकर गंभीर असंतोष है।
गुरपतवंत पन्नू का बड़ा कबूलनामा: पाकिस्तान के इशारे पर चल रहा है खालिस्तान आंदोलन, समर्थन के बिना नहीं चला सकते आंदोलन
