कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ षड्यंत्र, परमबीर सिंह सहित उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप
मुंबई/नागपुर। मालेगांव विस्फोट मामले से जुड़ी जांच के संदर्भ में एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। महाराष्ट्र एटीएस (एंटी टेरेरिज्म स्क्वॉड) के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने दावा किया है कि उन्हें आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को मालेगांव ब्लास्ट केस में फंसाने के लिए दबाव डाला गया था। उन्होंने इस साजिश के पीछे तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक शक्तियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है।
RSS प्रमुख को फंसाने का मिला था आदेश
महबूब मुजावर ने बताया कि यह पूरा षड्यंत्र वरिष्ठ अधिकारियों परमबीर सिंह और उनके ऊपर के उच्च पदस्थ अधिकारियों के आदेश पर रचा गया था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के इशारे पर एटीएस की जांच को भटका कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही थी।
सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग: सर्विस सीक्रेट फंड, हथियार और कर्मचारी तैनात
मुजावर के अनुसार उन्हें सरकारी खजाने से मिले सीक्रेट सर्विस फंड से वित्तीय सहायता दी गई। इस साजिश को अंजाम देने के लिए दस कर्मचारियों की एक टीम उनके अधीनस्थ की गई थी, और एटीएस की तरफ से उन्हें एक रिवॉल्वर भी सौंपी गई थी।
‘मोहन भागवत को मिलो और फिर उठाकर लाओ’—मिला था स्पष्ट निर्देश
पूर्व अधिकारी ने दावा किया कि उन्हें आदेश मिला था कि पहले मोहन भागवत जी से मुलाकात करो, बातचीत का बहाना बनाओ और उसके बाद किसी भी तरह उन्हें जबरन हिरासत में लाकर फर्जी केस में फंसाया जाए। इसके लिए उन्हें नागपुर, इंदौर, अजमेर और अन्य शहरों में भी भेजा गया, ताकि पूरी योजना को अंजाम दिया जा सके।
फर्जी गिरफ्तारी और जेल भेजने की भी थी योजना
महबूब मुजावर ने यह भी खुलासा किया कि जब उन्होंने इस साजिश में आगे बढ़ने से इनकार किया, तो उन्हें खुद फर्जी आरोपों में फंसाकर जेल भेजने की योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम देश की सुरक्षा एजेंसियों और न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
महबूब मुजावर के इस गंभीर आरोप से मालेगांव विस्फोट मामले की जांच पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यदि उनके दावों की स्वतंत्र जांच होती है और सच्चाई सामने आती है, तो यह देश की न्याय प्रणाली और सुरक्षा संस्थाओं में राजनीतिक दखल के खतरनाक उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।