हाथ मत लगाना मुझे… एक फ़ोन में सड़कें बंद! : चंद्रशेखर रावण भीम आर्मी चीफ की पुलिस को धमकी, वीडियो वायरल

चंद्रशेखर रावण का वीडियो वायरल, पुलिस को धमकाने के आरोप से मचा सियासी और प्रशासनिक हड़कंप

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को धमकाते हुए सड़क पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। वीडियो में सुने जा रहे कथित संवाद हाथ मत लगाना मुझे! इतना हल्का नहीं मैं, एक फ़ोन घुमाऊंगा, सारी सड़कें बंद हो जाएंगी! ने कानून-व्यवस्था, वीआईपी व्यवहार और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है।

क्या है वायरल वीडियो का मामला

वायरल क्लिप में चंद्रशेखर रावण को पुलिस बल के बीच तेज़ी से चलते/दौड़ते देखा जा सकता है। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों को प्रभाव का हवाला देते हुए चेतावनी दी। हालांकि, वीडियो की तारीख, स्थान और परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले की तथ्यात्मक जांच की जा रही है।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या किसी राजनीतिक व्यक्ति को कानून से ऊपर होने का दावा करने का अधिकार है? सोशल मीडिया पर यूजर्स पूछ रहे हैं कि यदि कोई आम नागरिक इस तरह पुलिस से बात करे, तो कार्रवाई क्या होगी? वहीं, कुछ समर्थक इसे एडिटेड/आउट-ऑफ-कॉन्टेक्स्ट वीडियो बताकर सफाई दे रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक रुख

राजनीतिक गलियारों में इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दल इसे “दबंगई और वीआईपी कल्चर” का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थक पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। प्रशासन की ओर से संकेत मिले हैं कि वीडियो की प्रामाणिकता, संदर्भ और कथित धमकी—तीनों पहलुओं की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

वीडियो वायरल होते ही ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हैशटैग ट्रेंड करने लगे। एक वर्ग इसे कानून के सम्मान से जोड़कर देख रहा है, तो दूसरा वर्ग राजनीतिक उत्पीड़न का दावा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सार्वजनिक आचरण बेहद संवेदनशील होता है और किसी भी पक्ष को संयम बरतना चाहिए।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच रिपोर्ट और आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है; वहीं, यदि वीडियो भ्रामक निकला, तो स्पष्टीकरण और तथ्य सामने लाना आवश्यक होगा।

> नोट: यह खबर वायरल वीडियो और सार्वजनिक दावों पर आधारित है।

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