रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा का बड़ा कदम: IAS संतोष वर्मा की विवादित टिप्पणी पर केंद्र सरकार को पत्र, कार्रवाई की मांग तेज

रीवा । ब्राह्मण कन्या के कन्यादान को लेकर IAS संतोष वर्मा द्वारा की गई कथित जातिगत टिप्पणी पर मध्यप्रदेश में घमासान जारी है। प्रदेशभर में उठे आक्रोश के बीच अब रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा भी सक्रिय हो गए हैं। सांसद ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस पूरी घटना को संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है।


IAS संतोष वर्मा के बयान पर नहीं थम रहा विवाद

IAS संतोष वर्मा द्वारा कन्यादान संबंधी कथित जातिगत टिप्पणी ने सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। समाज के विभिन्न वर्गों ने इस टिप्पणी को असंवेदनशील, अनुचित और जातीय सौहार्द को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। प्रदेश के कई जिलों में कर्मचारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं।

रीवा सांसद ने केंद्र सरकार को भेजा पत्र

सांसद जनार्दन मिश्रा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय (नई दिल्ली) को मामले की संपूर्ण जानकारी भेजी है। सांसद का कहना है कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा ऐसी टिप्पणी न सिर्फ जातीय सौहार्द को प्रभावित करती है, बल्कि यह संविधान प्रदत्त मूल्यों और आचरण संहिता का गंभीर उल्लंघन भी है।

सांसद ने क्या मांग की?

अपने पत्र में मिश्रा ने यह स्पष्ट लिखा है कि कन्यादान जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक विषय पर की गई जातिगत टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक है। ऐसे वक्तव्य समाज में अनावश्यक वैमनस्य, भ्रम और सामाजिक तनाव पैदा करते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए IAS संतोष वर्मा के विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

प्रदेशभर में विरोध के स्वर तेज

IAS संतोष वर्मा की टिप्पणी के बाद प्रदेश में विरोध लगातार बढ़ रहा है। कई सामाजिक, पारिवारिक और राजनीतिक संगठनों ने इस बयान को असंवेदनशील और ऊटपटांग बताते हुए इसे वापस लेने व कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अलग-अलग जिलों में ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं और कर्मचारियों ने भी आवाज उठाई है।

निष्कर्ष

IAS वर्मा के बयान ने एक बड़ा सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। अब जबकि रीवा सांसद का हस्तक्षेप भी सामने आ गया है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और प्रशासन इस मसले पर आगे क्या रुख अपनाते हैं। विवाद थमने की बजाय लगातार तूल पकड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में और राजनीतिक हलचल की संभावना बढ़ गई है।

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