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गांदरबल में JKP की बड़ी कार्रवाई: हिजाब और फेरन के पीछे छिपा आतंकी नेटवर्क बेनकाब

गांदरबल । जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक अहम सवाल फिर सामने आया हैआम नागरिक और आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच फर्क कैसे किया जाए? हाल ही में गांदरबल जिले में हुई एक कार्रवाई ने इस बहस को और तेज कर दिया है, जहां हिजाब पहनी कश्मीरी लड़कियों और फेरन पहने एक व्यक्ति की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियों को उजागर किया है।

खुफिया इनपुट पर JKP का सटीक ऑपरेशन

जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) के डिस्ट्रिक्ट गांदरबल ने देर शाम गुंडरेहमान ब्रिज के पास एक विशेष ऑपरेशन चलाया। विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस स्टेशन गांदरबल और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने संयुक्त रूप से नाका चेकिंग की। इस दौरान एक लोड कैरियर वाहन (JK15B-7309) को रोका गया। तलाशी के दौरान पुलिस को वाहन से एक चीनी पिस्टल, एक पिस्टल मैगज़ीन, चार जिंदा कारतूस, दो हैंड ग्रेनेड और ₹8,40,500 नकद बरामद हुए। यह बरामदगी आतंकी नेटवर्क के लिए फंडिंग और हथियार सप्लाई की ओर इशारा करती है।


गिरफ्तार आरोपी और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान गुलाम नबी मीर (पुत्र मोहम्मद सुभान मीर), निवासी हाजिन, बांदीपोरा और शबनम नज़ीर (पुत्री नज़ीर अहमद गनी), निवासी शालाबुग, गांदरबल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि इनमें हिजाब पहनने वाली तीन कश्मीरी लड़कियां और एक फेरन पहने व्यक्ति शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

सुरक्षा बनाम पहचान: बड़ा सवाल

यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि आतंकवादी संगठन आम नागरिकों की पहचान और वेशभूषा की आड़ लेकर काम कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी हो जाती है, जबकि आम नागरिकों के सामने यह दुविधा बनी रहती है कि आतंक से जुड़े लोगों और सामान्य नागरिकों में फर्क कैसे किया जाए।

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