भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेष मंगोलिया रवाना, मध्यप्रदेश को मिलेगी वैश्विक पहचान

Bhopal के Raja Bhoj Airport से भगवान बुद्ध के परम शिष्यों Sariputra और Mahamoggallana के पवित्र अस्थि अवशेष राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया के लिए रवाना किए गए। इस अवसर पर आयोजित गरिमामयी समारोह में मध्यप्रदेश सरकार, बौद्ध धर्मगुरुओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने सहभागिता की।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री Prahlad Singh Patel ने कहा कि यह केवल मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि इन पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन से प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और बौद्ध देशों के श्रद्धालुओं का आकर्षण बढ़ेगा।

सांची और बौद्ध विरासत को मिलेगा वैश्विक विस्तार

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों का संरक्षण दुनिया के केवल तीन देशों—भारत, श्रीलंका और म्यांमार—में ही है। ऐसे में Sanchi Stupa जैसे बौद्ध धरोहर स्थलों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि सांची केवल अपने ऐतिहासिक स्तूपों के कारण ही विश्व धरोहर स्थल नहीं है, बल्कि इन पवित्र अवशेषों की उपस्थिति इसे वैश्विक श्रद्धा का केंद्र बनाती है। मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले थाईलैंड में इन अवशेषों के प्रदर्शन को लाखों श्रद्धालुओं ने देखा था, जिसने भारत और बौद्ध देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया।

“विकास भी, विरासत भी” की भावना पर जोर

Priyank Mishra ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व और शांति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के “विकास भी, विरासत भी” मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम भारत की उस पहचान को मजबूत करते हैं, जिसमें देश को प्राचीन काल से विश्वगुरु माना जाता रहा है।

बौद्ध धर्मगुरुओं ने बताया सांची को आध्यात्मिक धरोहर

कार्यक्रम में उपस्थित बौद्ध धर्मगुरु Ban Gal Upatissa Nayaka Thero ने कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं बल्कि बौद्ध आध्यात्मिकता का अनुपम केंद्र है। उन्होंने बताया कि जब ये पवित्र अवशेष थाईलैंड ले जाए गए थे, तब लगभग 55 लाख श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक दर्शन किए थे।

उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में इन रेलिक्स का अत्यंत उच्च स्थान है और सांची जैसे पवित्र स्थल से जुड़ना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत माध्यम बन रही बौद्ध विरासत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बौद्ध विरासत आज सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। श्रीलंका, थाईलैंड, मंगोलिया, जापान और म्यांमार जैसे देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने में ऐसे कार्यक्रम बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

समारोह में International Buddhist Confederation के प्रतिनिधियों सहित कई प्रशासनिक और धार्मिक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच पवित्र अवशेषों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी गई।

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