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भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कैसी जीरो टॉलरेंस नीति, जिंदा को मुर्दा बना करोड़ों का घोटाला

पीएम मोदी कर गए ऐलान अब एक भी भ्रष्टाचारी नहीं बचेगा, इधर मप्र में अफसर और नेताओं की सांठ-गांठ से भ्रष्टाचार बना शिष्टाचार
भोपाल । अभी दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का बखान कर गए। वहीं मप्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर मंच से दम भरते हैं। लेकिन इन सबके बावजूद मप्र में अधिकारी और नेता मिलकर सरकारी योजनाओं में पात्र हितग्राहियों को मुर्दा बताकर करोड़ों रुपए का घोटाला कर रहे हैं। ऐसा कोई भी जिला नहीं है, जहां सरकारी योजनाओं की पात्रता से लोगों को बाहर कर घपला-घोटाला किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना हो, खाद्यान्न वितरण योजना, मनरेगा या फिर कोई अन्य योजना अधिकारी और नेता मिलकर पात्र हितग्राहियों का हिस्सा खा रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि पहले मैनुअल काम होने पर भ्रष्टाचार होता था और अब ऑनलाइन काम होने पर भी उससे अधिक भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

हाल ही में शिवपुरी जिले में 26 जिंदा लोगों को मृत बताकर उनके कफन-दफन की अनुग्रह राशि हड़पे जाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि विदिशा जिले की कुरवाई क्षेत्र की ग्राम पंचायत खजुरिया जागीर में भी जिंदा इंसानों को मरा घोषित कर देने का एक बड़ा मामला सामने आया है।

विदिशा की ग्राम पंचायत खजुरिया जागीर में पंचायत के 40 से अधिक लोग, जो अभी भी जीवित और स्वस्थ हैं, उन्हें एसपीआर पोर्टल से मृत घोषित कर दिया गया है। हालांकि, ऐसा करके वहां शासन को किसी प्रकार का चूना तो नहीं लगाया गया है, इसकी तस्दीक की जा रही है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब पांच लोगों ने इस बाबत शिकायत की कि उन्हें मृत बता दिया गया है।

पोर्टल का रिकॉर्ड खंगाला गया तो ऐसे 40 से अधिक लोगों के नाम सामने आए हैं, जो जीवित हैं और पोर्टल में मार दिए गए हैं। इधर, ग्राम पंचायत की सरपंच वर्षा राजपूत ने इस पूरे कांड को उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास करार दिया है। उन्होंने जनपद सीईओ और थाना प्रभारी को दी गई शिकायत में कहा है कि ग्राम पंचायत के एसपीआर पोर्टल पर पिछले कुछ दिनों से किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत प्रवेश किया गया है।

साथ ही पंचायत के डेटा से छेड़छाड़ की गई और कुछ जिंदा लोगों को मरा बताया गया है। कागजों में मार डाले थे 279 लोग! गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सिवनी जिले में सामने आया। तहसीलदार ऑफिस के एक क्लर्क पर 11 करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगा है। इसके लिए उसने कागजों में 279 लोगों को मृत दिखा दिया।

आरोपी ने कागजों पर जिंदा लोगों को मरा दिखाया। साथ ही कई ऐसे फर्जी नाम भी सामने आए हैं जिनको मरा बताकर उनके नाम से फर्जी आदेश बनाकर शासन से 4-4 लाख रुपये की राहत राशि स्वीकृत करा ली। जीवित वृद्धा की पेंशन मुर्दा महिला को इंदौर नगर निगम द्वारा वृद्धा पेंशन को लेकर किए जा रहे बड़े बड़े खेल सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों जहां कई महिलाओं ने पेंशन नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी।

वहीं अब जीवित वृद्धा की पेंशन महीनों पहले परलोक सिधारी को मिलने का मामला उजागर हुआ है। जीवित महिला को निगम ने मृत घोषित कर दिया। जनसुनवाई में पहुंचे नरेंद्र विश्वकर्मा ने मां 75 वर्षीय भूरीबाई को नगर निगम द्वारा वृद्धा पेंशन नहीं दिए जाने की शिकायत कलेक्टर से की तो जांच में जो खुलासा हुआ। वह चौका देने वाला था।

एक ही नाम की दो महिला अलग अलग वार्ड में निवासरत होने के बावजूद भी निगम में जीवित को मृत और मृत को जिंदा बताकर पेेंशन वितरण कर डाला। महीनों पहले परलोक सिधारी अन्य भूरीबाई के खाते में जीवित भूरीबाई विश्वकर्मा की पेंशन जारी कर दी गई। हालांकि कलेक्टर इसे टेक्नीकल गड़बड़ी बता रहे हैं। लेकिन नगर निगम की कार्यप्रणाली इसी तरह के मामलों से उजागर हो रही है।

जिंदा मजदूरों को मृत बताकर हड़पे 96 लाख मप्र अक्सर ऐसे कारनामे होते हैं, जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता। शिवपुरी जिले में भ्रष्टाचार का अजब कारनामा हुआ, जहां जिंदा मजदूरों को मृत बताकर 96 लाख रुपये की राशि हड़प ली गई है। इस मामले के उजागर होने पर पांच अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।

यह मामला शिवपुरी जनपद पंचायत का है। यहां मजदूरों के लिए सरकार की एक योजना की आड़ में घोटाला हुआ। मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल द्वारा पंजीकृत श्रीमिकों को अंत्येष्टि व अनुग्रह सहायता दी जाती है। इस योजना में जिंदा श्रमिकों को शिवपुरी जनपद के अफसरों ने मृत बता दिया।

इन श्रमिकों को मृत बताकर इनके नाम पर मिलने वाली राशि को दूसरे व्यक्तियों के खाते में डालकर राशि निकाल ली गई। इस योजना में शिवपुरी जनपद में 93.56 लाख रु. का गबन सामने आया है। जिला पंचायत सीईओ की अध्यक्षता में गठित समिति की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि 26 हितग्राहियों के नाम पर केस बनाकर धांधली हुई है।

जिंदा लोगों के नाम से इतना बड़ा गबन किया है। इसमें दो जनपद सीईओ के डिजिटल सिग्नेचरों से राशि निकली है। संबंधित शाखा की दो महिला लिपिक भी मामले में जिम्मेदार पाई गईं हैं। सिटी कोतवाली थाने में कम्प्यूटर ऑपरेटर, दो जनपद सीईओ और दो महिला लिपिक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।

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