भीषण गर्मी में रेलवे का नया राहत मॉडल: स्टेशनों पर ‘मिस्टिंग सिस्टम’ से यात्रियों को मिल रही ठंडक, देखें वीडियो

बिलासपुर । देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच South East Central Railway ने यात्रियों को राहत देने के लिए प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मिस्टिंग सिस्टम शुरू कर एक महत्वपूर्ण पहल की है। बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और गोंदिया जैसे व्यस्त स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगाए गए वाटर मिस्टिंग सिस्टम अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

गर्मी के मौसम में भारतीय रेलवे स्टेशनों पर लाखों यात्री घंटों ट्रेन का इंतजार करते हैं। ऐसे में खुले प्लेटफॉर्म, गर्म लोहे की संरचनाएं और भीड़भाड़ मिलकर तापमान को और अधिक असहनीय बना देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्लेटफॉर्म का वास्तविक तापमान कई बार आसपास के शहर के तापमान से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक महसूस होता है। इसी चुनौती को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने सूक्ष्म जल फुहारों पर आधारित “मिस्ट कूलिंग टेक्नोलॉजी” को सक्रिय किया है।

कैसे काम करता है मिस्टिंग सिस्टम

मिस्टिंग सिस्टम अत्यंत महीन जल कणों को हवा में छोड़ता है, जो तुरंत वाष्पित होकर आसपास के तापमान को कम करने में मदद करते हैं। यह तकनीक एयर कंडीशनिंग की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करती है और खुले स्थानों के लिए अधिक प्रभावी मानी जाती है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दोपहर के समय जब प्लेटफॉर्म का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब यह व्यवस्था यात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। बुजुर्ग, बच्चे और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को इससे सबसे अधिक राहत मिल रही है।

क्यों जरूरी हो गई हैं ऐसी व्यवस्थाएं

भारत में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब सार्वजनिक परिवहन व्यवस्थाओं पर भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं।

ऐसे में रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक नेटवर्क को केवल परिवहन सेवा नहीं, बल्कि “क्लाइमेट रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर” के रूप में विकसित करना आवश्यक माना जा रहा है। मिस्टिंग सिस्टम, वाटर रिफिल पॉइंट, शेड विस्तार और ग्रीन प्लेटफॉर्म जैसी व्यवस्थाएं भविष्य के रेलवे मॉडल का हिस्सा बन सकती हैं।

यात्री सुविधा से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य तक

Indian Railways पिछले कुछ वर्षों में स्टेशनों को केवल ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि यात्री अनुभव केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। मिस्टिंग सिस्टम जैसी पहलें इस सोच को और मजबूत करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश के अन्य बड़े और भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर भी ऐसी तकनीक लागू की जाती है, तो गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं — जैसे डिहाइड्रेशन, हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक — के मामलों में कमी लाई जा सकती है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की यह पहल दिखाती है कि बदलते मौसम के दौर में यात्री सुविधाओं की परिभाषा भी बदल रही है, जहां आराम, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय अनुकूलन तीनों को साथ लेकर चलना होगा।

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