
एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में सशक्त पहल
भोपाल। एम्स भोपाल ने आरोग्य भारती के सहयोग से आरोग्य मंथन-2 राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगोष्ठी का सफल आयोजन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान करना और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ समान रूप से पहुँचाना है। इस संगोष्ठी का केंद्रीय विषय था एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य प्रणाली – वर्तमान समय की आवश्यकता।
समग्र स्वास्थ्य व निवारक देखभाल पर विशेष जोर
कार्यक्रम का मूल मंत्र “स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ ग्राम, स्वस्थ राष्ट्र” रहा, जिसके माध्यम से निवारक चिकित्सा, जीवनशैली सुधार और समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों के महत्व को रेखांकित किया गया। संगोष्ठी में देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और चिकित्सकों ने एकीकृत स्वास्थ्य ढांचे पर गहन चर्चा की।
आधुनिक व पारंपरिक चिकित्सा के संतुलित उपयोग पर बल
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, नियमित उपवास जैसी अनुशासित आदतें अपनाने तथा आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की अनावश्यक तुलना से बचने की सलाह दी। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रसिद्ध पुस्तक “Love, Medicine and Miracles” पढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश पाटणकर (प्रसिद्ध यूरो सर्जन, पुणे) ने रोबोटिक सर्जरी, जीवनशैली संबंधी रोगों में तेजी से हो रही वृद्धि और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय (राष्ट्रीय संगठन सचिव, आरोग्य भारती) ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल, निवारक उपायों और चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय को भविष्य की सबसे प्रभावी स्वास्थ्य नीति बताया।
स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण की दिशा में सार्थक संदेश
कार्यक्रम में श्री संदेश कुमार जैन (उप निदेशक, प्रशासन) और प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी (डीन, अकादमिक) भी उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि समय पर इलाज, निवारक कदम और एकीकृत चिकित्सा प्रणाली अपनाकर ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।






