
युवाओं के लिए देश की रक्षा के खातिर मोदी सरकार ने भले ही अग्निवीर योजना देकर उनके कंधे पर बंदूक लाद दी हो, क्या वाकई में इस अग्निवीर योजना से देश की रक्षा, सुरक्षा और युवाओं के भविष्य पर मानक स्तर पर कोई सवाल खड़ा नहीं हो रहा है? सशस्त्र सेना की मंशा के खिलाफ और भारतीय सेवा के परामर्श को दरकिनार करके अग्निपथ योजना क्या मोदी सरकार के दावे को बेनकाब नही कर रही है ? क्या यह योजना सेना की मंशा अनुरूप लागू की गई है। सियासत के पेंच में फंसे अग्निवीर को लेकर सवाल दर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवरे द्वारा प्रकाशित पुस्तक *”FOUR STARS OF DESTINY”* मैं भी इस बात का उल्लेख किया गया है की अग्निवीर योजना सेना की मंशा के अनुरूप लागू नहीं की गई है। यह पहला अवसर नहीं है जब सेवा के किसी शीर्ष अधिकारी ने इस अग्नि वीर योजना के खिलाफ अपने स्वर मुखर किये हों, इससे पहले भी भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने भी 2020 में एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि सैनिकों को भरी जवानी में रिटायरमेंट ना दिया जाए।
इतना ही नहीं देश के सेना में अपना जौहर दिखाने, देश की रक्षा में योगदान देने वाले मध्य प्रदेश के मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने भी अग्निवीर योजना पर अपना तर्क देते हुए आजाद भारत के इतिहास में केन्द्र की वर्तमान सरकार के संरक्षण में भारतीय सेना के साथ हुआ सबसे बड़ा कुठाराघात बताया है। क्या अग्निवीर योजना के नाम पर युवाओं का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है ? या देश पर मर मिटने वाले हमारे सैनिकों का मनोबल कम किया जा रहा है ? या उनके हौसलों को चकनाचूर किया जा रहा है? क्या देश की रक्षा–सुरक्षा करने वाले सैनिकों पर एक तमाचा दिया जा रहा है? क्या अग्निवीर योजना युवाओं के लिए और उनके भविष्य के लिए घातक है ? या फिर देश सेवा के दौरान अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सैनिकों की शहादत का मखौल उड़ाने के अलावा कुछ नहीं है। आज देश जिस संकट से जूझ रहा है, हमारे देश के सैनिकों को देश की रक्षा के लिए 24 घंटे सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक सिपाही जब देश की रक्षा के लिए तैयार होता है तो 2 से 4 साल तो प्रशिक्षण में ही बीत जाते हैं, जब वह बॉर्डर पर तैनात होता है तो दुश्मन पर पैनी नजर रखनी होती है, जरा सी चूक से देश पर संकट आ जाता है, तो क्या ऐसे में जो 4 साल के लिए देश की रक्षा के लिए भर्ती होने वाला अग्निवीर पूरी तरह परिपक्व हो सकता है? क्या वह निडरता से सीमा पर तैनात हो सकेंगे? चार साल में एक बच्चा पहली क्लास भी पास नहीं कर पता है तो क्या अग्निवीर देश सेवा की अग्नि परीक्षा में पूर्णत: सफल हो सकता है? हर भारतवासी के मन में यह सवाल कौंध रहा है कि क्या अग्निवीर देश रक्षा के लिए आवश्यक है? अथवा अग्निवीरों से देश में बेरोजगारी बढ़ने का संकट मंडराएगा। यदि इस अग्निवीर योजना की समीक्षा कर कोई समाधान नहीं निकाला तो युवाओं को रोजगार जैसी अग्नि परीक्षा से जूझना पड़ेगा जो बहुत भयावह परिणाम देश की रक्षा पर घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिए अग्निवीरों के भविष्य की सुरक्षा के लिए देश के रक्षा मंत्रालय को अग्निवीर योजना पर गहन अध्ययन और मंथन करने की बेहद आवश्यकता है।
बात तो तब और असहज महसूस होती है जब एक अग्निवीर की चार साल की सेवा के बाद रिटायर्ड हो जाने के बाद उसे नौकरी कौन देगा, सीमा पर कुर्बानी देने पर क्या उसे शहीद का दर्जा मिलेगा? उसका परिवार का पालन पोषण कौन करेगा? उसके माता-पिता की सेवा कौन करेगा?
यहां एक और देखा जाए की एक सैनिक 17 साल देश की सेवा करने के बाद भी बेरोजगार जैसा हो जाता है तो फिर अग्निवीरों को नौकरी कौन देगा? सवाल यह भी उठता है कि क्या सैनिकों की भांति अग्निवीरों को भी स्थाई नौकरी दी जाएगी या फिर उन्हें देश में बढ़ती इस भीषणतम बेरोजगारी से अनभिज्ञ रखा जायेगा? सियासत की गलियारों में इसका जवाबदेह कौन ?



