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जापान में एक गांव ऐसा भी जहां इंसान बन जाते हैं पुतले

टोकियो । जापान में एक गांव ऐसा भी है जहां इंसान पुतले बन जाते हैं। इन पुतलों को ‎बिजूका कहा जाता है। यहां पर 18 साल से ‎किसी बच्चे ने जन्म नहीं ‎लिया है। हालां‎कि दुनिया में अजीबोगरीब जगहें होती हैं। ऐसी ही बेहद हट कर एक जगह जापन में भी है, जहां इंसानों से ज्यादा पुतलों का बसेरा है। जानकारों की मानें तो जापान में एक गांव है, जहां इंसानों से ज्यादा पुतलों की आबादी है। नागोरो नाम के गांव में इंसानी आबादी से ज्यादा पुतलों की है। स्थानीय तौर पर इन पुतलों को बिजूका कहते हैं। जापान के नागोरो गांव के स्कूलों में बच्चों की जगह बिजूका पढ़ते दिखाई देते हैं। नागोरो गांव लगभग पूरा वीरान पड़ा हुआ है। गांव में केवल बुजुर्ग ही रह गए हैं, युवाओं की संख्या कम होने की वजह से इस गांव में 18 सालों से किसी बच्चे ने भी जन्म नहीं लिया है। एक समय में नागोरो गांव की आबादी 300 थी लेकिन समय की रफ्तार के साथ बाकी आबादी भी गांवों से प्रस्थान कर गई। नागोरो गांव के बारे में दिलचस्प कहानी है।

इस गांव में रहने वाली अयानो सुकिमी ने पहले शौकिया तौर पर गांव के लिए अपने पिता के कपड़ों से एक बिजूका तैयार किया। बाद में अयानो सुकिमी ने इसे अपना मिशन बना लिया। पुतलों के नागोरो गांव को देखने के लिए अब दूर- दराज से लोग आते हैं। अक्टूबर के पहले रविवार को एक खास त्योहार मनाया जाता है, जिसमें पुतलों को देखने लोग आते हैं। इस गांव पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी तैयार हो चुकी है। नागोरो गांव में आज सिर्फ पुतले ही पुतले दिखते हैं। ये पुतले यहां रहने वालों की तन्हाई दूर करने के लिए बनाए गए हैं। साल 2014 में जर्मन फिल्म मेकर फ्रिट्ज़ शूमन ने नागोरो गांव को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी। तब से यह पुतलों का गांव चर्चा में आया।

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