स्थानांतरण प्रक्रिया और नई पद संरचना को लेकर प्रदेशभर के शिक्षक आक्रोशित, एजुकेशन पोर्टल 3.0 बना विवाद की जड़

भोपाल, । मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के स्थानांतरण और पद संरचना को लेकर गहराता असंतोष अब आंदोलन की स्थिति तक पहुँच गया है। एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा की गई पद संरचना में मनमाने और अतार्किक बदलावों ने हजारों शिक्षकों को अतिशेष (surplus) की श्रेणी में ला खड़ा किया है।
शिक्षकों का कहना है कि न केवल छात्र-शिक्षक अनुपात में असंतुलन किया गया है, बल्कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पोर्टल की खामियों के चलते कई योग्य और कार्यरत शिक्षक अनावश्यक रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानांतरण प्रक्रिया में अव्यवस्था: शिक्षक बने ‘अतिशेष’ का शिकार
विगत वर्ष की अतिशेष प्रक्रिया में पोर्टल अपडेट नहीं होने के बावजूद संकुल प्राचार्यों की रिपोर्टों को नजरअंदाज कर, अधिकारियों ने ऐसे शिक्षकों की पदस्थापना उन शालाओं में कर दी जहाँ पहले से ही पर्याप्त शिक्षक कार्यरत थे। इन अनियमितताओं की शिकायतें लगातार हुईं, लेकिन अधिकारियों ने समाधान नहीं किया। नतीजतन, इस वर्ष उन्हीं शालाओं में कार्यरत शिक्षकों को अतिशेष घोषित कर जबरन स्थानांतरण हेतु आवेदन करने को मजबूर किया जा रहा है।
वर्तमान में भी पोर्टल अपडेट नहीं है, जिससे अतिशेष शिक्षकों की संख्या में भारी वृद्धि और रिक्त पदों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है।
एजुकेशन पोर्टल 3.0: नई पद संरचना ने मचाई अफरा-तफरी
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा लागू एजुकेशन पोर्टल 3.0 में स्कूल-वार पद संरचना में असंगत परिवर्तन किए गए हैं। शिक्षकों के अनुसार, ये परिवर्तन नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 25 के प्रावधानों के खिलाफ हैं।
नई पद संरचना में क्या है गड़बड़ी?
विशेषीकृत संदीपनी शालाओं (अधिकांशतः शहरी क्षेत्र में) में छात्र-शिक्षक अनुपात 180:1 रखा गया है,
जबकि गैर-विशेषीकृत और ग्रामीण शालाओं में यह अनुपात 235:1 तक कर दिया गया है।
विगत वर्षों में यह अनुपात 160:1 था, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती थी।
यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करेगा और वहां शिक्षकों की भारी कमी उत्पन्न करेगा।
ग्रामीण शालाओं में शिक्षक, प्राचार्य और लिपिक की भारी कमी
ग्रामीण हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में प्राचार्य, लिपिक और भृत्य जैसे प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति नहीं है। ऐसे में शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि “एक राष्ट्र, एक शिक्षा” की नीति तब तक असफल रहेगी जब तक शहरी और ग्रामीण शालाओं के लिए एक समान पद संरचना नहीं होगी।
आरटीई 2009 के प्रावधानों के खिलाफ नई नीति
आरटीई एक्ट 2009 के तहत:
प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1-5) में:
1-60 छात्रों पर 2 शिक्षक
61-90 छात्रों पर 3 शिक्षक
91-120 छात्रों पर 4 शिक्षक
121-200 छात्रों पर 5 शिक्षक
200 से ऊपर 40:1 अनुपात मान्य
माध्यमिक स्कूल (कक्षा 6-8) में:
हर विषय (गणित-विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, भाषा) हेतु एक शिक्षक
प्रत्येक 35 छात्रों पर एक अतिरिक्त शिक्षक
नई संरचना में:
प्राथमिक शालाओं में 1-74 छात्रों पर सिर्फ 2 शिक्षक,
माध्यमिक स्कूलों में 122 छात्रों तक सिर्फ 3 शिक्षक,
जो कि सीधे तौर पर आरटीई एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध है। इससे अतिशेष शिक्षकों की संख्या में भारी वृद्धि हो गई है।
शिक्षकों की मांग: पुरानी छात्र-शिक्षक अनुपात नीति बहाल की जाए
प्रदेश भर के प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों के शिक्षक समुदाय की मांग है कि:
एजुकेशन पोर्टल 3.0 की पद संरचना को तुरंत निरस्त किया जाए,
आरटीई 2009 के अनुसार पुराना छात्र-शिक्षक अनुपात बहाल किया जाए,
स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और पोर्टल अपडेट की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो शिक्षक समुदाय संयुक्त आंदोलन और न्यायिक हस्तक्षेप के लिए बाध्य होगा।





