एम्स भोपाल में चिकित्सा चमत्कार: 45 दिनों के वेंटिलेशन के बाद प्री-टर्म शिशु की सफल एक्सट्यूबेशन

भोपाल, 2025: एम्स भोपाल ने एक और चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। 45 दिनों तक वेंटिलेशन पर रहने वाले एक प्री-टर्म शिशु को सफलतापूर्वक एक्सट्यूबेट किया गया और अब वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट रहा है।
क्या है एक्सट्यूबेशन?
‘एक्सट्यूबेशन’ एक महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें श्वसन नली (एंडोट्रेकियल ट्यूब) को हटाया जाता है जब रोगी खुद से सांस लेने में सक्षम हो जाता है। यह प्रक्रिया गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं और अन्य रोगियों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है।
शिशु की दादी का अटूट विश्वास बना प्रेरणा
इस सफलता के पीछे सिर्फ चिकित्सा विज्ञान ही नहीं, बल्कि एक 75 वर्षीय दादी का अटूट विश्वास और समर्पण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। आर्थिक कठिनाइयों और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, उन्होंने अपने पोते के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया। उनका यह संघर्ष हर परिवार के लिए प्रेरणादायक है।
एम्स भोपाल के चिकित्सा दल की कड़ी मेहनत
एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा,
“यह मामला चिकित्सा सेवा में समर्पण और परिवारिक प्रेम की अनूठी मिसाल है। एम्स भोपाल में हम हर मरीज को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस उपलब्धि के पीछे हमारे डॉक्टरों, नर्सों और चिकित्सा दल की कड़ी मेहनत है। यह कहानी समाज में आशा और विश्वास का संदेश देती है।”
शिशु के उपचार में प्रमुख भूमिका निभाने वाले विशेषज्ञ:
डॉ. चेतन खरे (सहायक प्रोफेसर, नियोनेटोलॉजी)
नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) के विशेषज्ञ
नर्सिंग स्टाफ
तीसरे वर्ष के पीजी छात्र
एम्स भोपाल: नवजात चिकित्सा सेवाओं में अग्रणी
एम्स भोपाल का नवजात गहन चिकित्सा विभाग (NICU) जटिल नवजात मामलों के इलाज में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस केस ने साबित किया कि सही चिकित्सा देखभाल और परिवार के संबल से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।





