भोपाल में जनगणना-2027 की सख्त निगरानी, अब रेंडम चेकिंग से होगी डेटा की क्रॉस वेरिफिकेशन

भोपाल में चल रही जनगणना-2027 की हाउस लिस्टिंग प्रक्रिया अब केवल डेटा संग्रह तक सीमित नहीं रह गई है। प्रशासन ने सर्वे की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए क्रॉस वेरिफिकेशन और रेंडम चेकिंग अभियान भी शुरू कर दिया है। मास्टर ट्रेनर और वरिष्ठ अधिकारी फील्ड में जाकर सीधे प्रगणकों के कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि कोई मकान या परिवार गणना से छूट न जाए।

क्यों जरूरी है क्रॉस वेरिफिकेशन?

जनगणना विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे विशाल और तेजी से बदलते शहरी ढांचे वाले देश में “डेटा की शुद्धता” सबसे बड़ी चुनौती होती है। खासकर भोपाल जैसे शहरों में:

बंद मकान,

किरायेदारों का लगातार बदलना,

मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट्स,

और तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियां
सर्वे कार्य को जटिल बना देती हैं।


इसी कारण प्रशासन अब “एचएलबी” यानी हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स की दोबारा जांच करवा रहा है।

किन क्षेत्रों में हो रही जांच?

जिला जनगणना अधिकारियों के निर्देश पर सुरेन्द्र सिंह रघुवंशी और अन्य अधिकारी नगर निगम के जोन 2, जोन 4 और जोन 5 में फील्ड निरीक्षण कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने:

भवनों की नंबरिंग,

चतुर्थ सीमाओं (ब्लॉक बाउंड्री),

बंद मकानों की स्थिति,

और छूटे हुए भवनों की संभावना
की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।


बंद मकान सबसे बड़ी चुनौती

जनगणना टीमों को सबसे ज्यादा परेशानी उन मकानों में आ रही है जो सर्वे के दौरान बंद मिलते हैं। ऐसे मामलों में अब प्रगणकों को दोबारा जाकर सत्यापन करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि ऐसे घर छूट जाते हैं तो:

जनसंख्या अनुमान प्रभावित हो सकता है,

शहरी सुविधाओं का डेटा गलत हो सकता है,

और भविष्य की सरकारी योजनाओं की गणना पर असर पड़ सकता है।


डिजिटल जनगणना का नया मॉडल

इस बार जनगणना प्रक्रिया में मोबाइल एप आधारित डेटा एंट्री और डिजिटल निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक के बावजूद “मानवीय सत्यापन” अब भी बेहद जरूरी है।

यही वजह है कि प्रशासन:

रेंडम फिजिकल चेकिंग,

सुपरवाइजर मॉनिटरिंग,

और फील्ड क्रॉस वेरिफिकेशन
जैसी प्रक्रियाओं को समानांतर चला रहा है।


भविष्य की योजनाओं से जुड़ा है यह डेटा

शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना-2027 के आंकड़े अगले दशक की:

सड़क परियोजनाओं,

जल आपूर्ति,

स्वास्थ्य सेवाओं,

आवास योजनाओं,

और स्मार्ट सिटी विकास
की आधारशिला बनेंगे।


यदि डेटा में त्रुटियां रह गईं, तो संसाधनों का वितरण भी प्रभावित हो सकता है।

प्रशासन की प्राथमिकता क्या है?

भोपाल प्रशासन का फोकस अब केवल समय सीमा में सर्वे पूरा करने पर नहीं, बल्कि “पूर्ण और सटीक डेटा” तैयार करने पर है। इसी कारण फील्ड स्तर पर प्रगणकों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं कि कोई भी भवन या परिवार सूचीकरण से छूटे नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत की आगामी जनगणना देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक डेटा अभियानों में से एक होगी। ऐसे में भोपाल में हो रही रेंडम चेकिंग यह संकेत देती है कि प्रशासन डेटा गुणवत्ता को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

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