विदेश मंत्री जयशंकर के बयान से मचा राजनीतिक भूचाल – क्या भारत ने युद्ध से पहले पाकिस्तान को दे दी थी हमले की सूचना?

नई दिल्ली। एक चौंकाने वाले खुलासे में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि भारत ने युद्ध की शुरुआत में पाकिस्तान को सूचित किया था कि हमारा हमला केवल आतंकी शिविरों पर केंद्रित रहेगा। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
क्या दुश्मन को हमले की सूचना देना रणनीतिक भूल थी?
विपक्षी नेताओं और रक्षा विशेषज्ञों ने इस बयान को “गैरजिम्मेदाराना” बताते हुए कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि किसी भी देश को अपने दुश्मन को पहले से यह सूचना देना कि हमला कहां किया जाएगा, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चूक हो सकती है। इससे आशंका जताई जा रही है कि शायद आतंकियों को पहले से ही इस सूचना के आधार पर शिविरों से स्थानांतरित कर दिया गया हो, जिससे भारत के सटीक हमलों का सही असर नहीं हो पाया।
क्या पाकिस्तान को दी गई जानकारी से हुआ नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर वास्तव में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई कूटनीतिक केबल या सूचना का आदान-प्रदान हुआ, तो उसकी जांच अत्यंत आवश्यक है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस पूर्व सूचना के चलते भारत की सैन्य कार्रवाई को सफलता से वंचित होना पड़ा?
जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर #जयशंकर_बयान_विवाद ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग यह पूछ रहे हैं कि –
“क्या पाकिस्तान को चेतावनी देना सुरक्षा नीति के खिलाफ नहीं था?”
“क्या आतंकियों को पहले से खाली कर दिया गया था?”
“क्यों नहीं की गई इस सूचना के प्रभाव की गहराई से जांच?”
सरकार से पारदर्शिता की मांग
विपक्ष ने भारत सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है कि क्या सच में पाकिस्तान को कोई पूर्व सूचना भेजी गई थी, और यदि हां, तो इसके रणनीतिक परिणामों की समीक्षा की जाए। कई नेताओं ने इसे रक्षा प्रणाली में विश्वासघात तक बताया है और कहा है कि ऐसे बयान देश की सुरक्षा नीति को कमजोर करते हैं।





