State

भोपाल में मलेरिया और डेंगू नियंत्रण के लिए नवीन उपाय

भोपाल: वेक्टर जनित रोगों के प्रसार को रोकने के लिए, भोपाल के कलेक्टर, श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ने सभी सरकारी और निजी कार्यालयों को मलेरिया और डेंगू के नियंत्रण हेतु प्रभावी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। बारिश के मौसम में और उसके बाद जल-जमाव के कारण मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है, जिससे इन बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।

कलेक्टर ने जोर दिया कि अनुपयोगी वस्तुओं जैसे खाली डिब्बे, प्लास्टिक की बोतलें, और पुराने टायरों का निस्तारण करना चाहिए ताकि मच्छरों के प्रजनन के स्रोतों को नष्ट किया जा सके। इसके अलावा, कूलर के पानी को नियमित रूप से बदलने और पानी की टंकियों, बाल्टियों, और टबों को ढककर रखने की सलाह दी गई है।

**डॉ. प्रभाकर तिवारी,** मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी, ने बताया कि मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों से मलेरिया के मामलों में कमी आई है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि डेंगू और चिकनगुनिया के नियंत्रण के लिए सावधानियां बरतना जरूरी है।

मलेरिया, जो मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होती है, प्रदेश में सबसे प्रचलित बीमारी है। इसके दो मुख्य परजीवी, प्लाज्मोडियम फेल्सीफेरम और प्लाज्मोडियम वाईवेक्स, हैं। ठंड लगकर बुखार आना इसका प्रमुख लक्षण है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मलेरिया की जांच और दवाइयां निशुल्क उपलब्ध हैं, और आशा कार्यकर्ता के माध्यम से भी जांच करवाई जा सकती है। डेंगू, जो एडीज मच्छर के काटने से होती है, का लार्वा साफ पानी में पनपता है और इसे आसानी से पहचानकर नष्ट किया जा सकता है।

Related Articles