मध्यप्रदेश स्कूल किताब माफिया पर बड़ा आरोप, हर साल लाखों अभिभावकों से वसूले जाते हैं अरबों रुपये

कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी का बड़ा दावा, निजी स्कूल प्रशासन और किताब माफिया की सांठगांठ से हो रहा खुला भ्रष्टाचार
भोपाल, । मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों में सक्रिय किताब माफिया पर बड़ा आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा है कि हर साल प्रदेश के लाखों अभिभावकों से जबरन महंगी किताबें, स्टेशनरी और स्कूल ड्रेस खरीदवाई जाती है। यह स्कूल किताब माफिया अभिभावकों पर दबाव बनाकर उन्हें निर्धारित दुकानों से ही खरीददारी के लिए मजबूर करता है।
हर साल अरबों का घोटाला, स्कूल प्रशासन की मिलीभगत का आरोप
त्रिपाठी का कहना है कि हर साल मात्र एक-दो पन्ने बदलकर नया सिलेबस तैयार किया जाता है, जिससे पुराने किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों को महंगे दामों पर नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। इसी तरह हर एक-दो साल में स्कूल ड्रेस का रंग बदलकर भी अभिभावकों को आर्थिक रूप से लूटा जाता है।
इस कथित शिक्षा माफिया के साथ स्कूल प्रशासन और कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारी भी कमीशन के लालच में शामिल हो जाते हैं। त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि जब ये माफिया खुलेआम हर साल अरबों रुपये की लूट करता है, तब शासन-प्रशासन चुप क्यों रहता है?
जबलपुर कलेक्टर की कार्यवाही बनी मिसाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने जबलपुर जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में कलेक्टर ने किताब माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई की थी, लेकिन राज्य के अन्य जिलों में वैसी तत्परता नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी ही कार्यवाही पूरे प्रदेश में नहीं हुई, तो अगले 50 वर्षों तक यह माफिया अभिभावकों को लूटता रहेगा।
प्रशासन की आंख तब खुलती है जब घोटाला हो चुका होता है
त्रिपाठी का आरोप है कि प्रशासन तब तक मौन रहता है जब तक अरबों रुपये का भ्रष्टाचार हो नहीं जाता। और जब जनता का दबाव बढ़ता है, तो केवल दिखावे की कमेटियाँ बनाई जाती हैं, जिनकी रिपोर्ट कभी सामने नहीं आती।
एक अनुमान: कितना बड़ा है यह शिक्षा माफिया घोटाला?
अगर केवल 10 लाख परिवारों ने औसतन 5000 रुपये भी खर्च किए हैं तो यह घोटाला 500 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो सकता है। यह शिक्षा के नाम पर एक संगठित लूट है, जिसे शासन-प्रशासन की मौन सहमति प्राप्त है।
आम जनता से अपील
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य के अभिभावकों, समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस शिक्षा माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाएं और इस लड़ाई का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में बच्चों की शिक्षा एक महंगी मजबूरी बनकर रह जाएगी।





