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एग्रीकल्चर लैंड को डेवलप और फिर खरीदने के नाम पर रियल स्टेट कंपनी के दो डायरेक्टरों ने किसान को लगाई करोड़ो की चपत

भोपाल। पुराने शहर की शॉहजहानाबाद थाना पुलिस ने चूनाभट्टी इलाके में रहने वाले एक एक किसान कि शिकायत पर रियल स्टेट कंपनी के दो डायरेक्टरों के खिलाफ जालसाजी, अमानत में खयानत सहित अन्य धाराओ में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि जालसाजों ने उसे ढाई करोड़ की चपत लगाई है। दोनो ने डेवलपमेंट के नाग पर किसान की ढाई एकड़ जमीन ली थी, लेकिन उसे डेवलप न करते हुए उससे जमीन खरीदने का सौदा तय करते हुए विक्रय अनुबंध बना लिया और प्लॉट बेचकर जमीन का रुपए देने का कहा। इतना ही नहीं आरोपियों ने किसान की जमीन पर एक करोड़ रुपए का लोन भी ले लिया। कई प्लॉट बेचने के बाद भी आरोपियों ने उसे रकम नहीं दी। इधर लोन नहीं चुकाने पर निजी बैंक ने जमीन के अधिकग्रहण की कार्यवाही शुरु की तब किसान को ही वह रकम अदा करना पड़ी। मिली जानकारी के अनुसार चुना भट्टी स्थित ग्रीन एवेन्यू में रहने वाले उत्तम सिंह रघुवंशी पिता स्वर्गीय बीएस रघुवंशी ने लिखित शिकायत करते हुए बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी करते हैं। उनकी पहचान प्रॉपर्टी डीलिंग और डेवलपमेंट करने वाली लक्ष्य रियल मार्ट कंपनी के डायरेक्टर मनीष वर्मा पिता एके वर्मा और युगल किशोर पिता मेवालाल से थी। उनकी कोलार रोड के ग्राम थुआखेड़ा के पास दो हेक्टेअर से अधिक जमीन है। इस जमीन को डेवलप करने के लिए उन्होंने के साथ बातचीत तय करते हुए 27 दिसंबर, 2012 को एग्रीमेंट किया था। इस काम में उत्तम सिंह रघुवंशी के बेटे संजेश रघुवंशी भी पार्टनर थे। पार्टनरशिप के लिये लिखित एग्रीमेंट शॉहजहानाबाद थाना इलाके में स्थित जिला पंजीयक कार्यालय में हुआ था। बाद में मनीष वर्मा और युगल किशोर ने उत्तम सिंह से उस जमीन को खरीदने की बात की। उत्तम जमीन बेचने को राजी हो गए जिसका सौदा आठ करोड़ 80 लाख रुपए में तय हुआ था। जमीन खरीदी के सौदे का एग्रीमेंट 31 अगस्त, 2013 को दोबारा किया गया। आरोपियों ने उस समय कोई रकम ने देते हुए उत्तम सिंह रघुवंशी और उसके बेटे संजेश रघुवंशी से कहा था कि वह प्लॉट बेचकर तय समय में उनकी रकम अदा कर देगे। लेकिन आरोपियो ने फरियादी को कोई पैसा नहीं दिया बल्कि जमीन खरीदने के लिए जो एग्रीमेंट किया गया था, उसके आधार पर आरोपियों ने एक निजी होम लोन कंपनी से पांच करोड़ रुपए का लोन एप्रूव करा लिया और उस एप्रूव रकम में से डेढ़ करोड़ रुपए बैंक से ले भी लिए। मनीष वर्मा और युगल किशोर की जालजसाजी की जानकारी फरियादी को तब लगी जब लोन देने वाली कंपनी ने ईएमआई न मिलने पर थुआखेड़ा की जमीन की नीलामी की जाहिर सूचना प्रकाशित की। अपनी जमीन की बैंक द्वारा नीलामी किये जाने की बात पता चलने पर उत्तम सिंह और उनके बेटे ने मिलकर होम लोन कंपनी का पैसा अदा कर जमीन को बिकने से बचाया। बाद में जब उन्होनें और जानकारी जुटाई तब यह भी पता चला कि उत्तम सिंह और उनके बेटे संजेश ने जब जमीन को डेवलप करने के लिये पहली बार आरोपियेा से एग्रीमेंट किया था, तब जिला प्रशासन में आवेदन लगाया गया था। उस समय सरकारी नियमो के मुताबिक डेवलप होने तक जमीन के कुछ प्लॉट बंधक के रुप में देने थे। उन बंधक प्लॉटों को भी मनीष और युगल किशोर ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुद का बताते हुए संजय राजदान, सुरेंद्र सिंह ठाकुर नामक सहित अन्य व्यक्तियो को बेच दिए हैं। इसके बाद पीडित ने पुलिस में शिकायत की थी। आवेदन की जॉच के बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने फिलहाल दोनो नामजद आरोपियो के खिलाफ मामला कायम किया है।

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