
भोपाल, । एक लापरवाही नहीं, सुनियोजित घोटाला है जो सरकारी गोदामों में अनाज के सड़ने के बारे में है। इस घोटाले के तहत सरकार ने अनाज खरीदा, गोदामों में भरा, और फिर उसका एक बड़ा हिस्सा गोदामों में ही सड़ दिया। पहली नजर में यह लापरवाही लग सकती है, लेकिन कई मामलों में सामने आई शिकायतों और जांच के दौरान पाया गया है कि अनाज सड़ा नहीं था, बल्कि रिकॉर्ड में सड़ाया गया था। अफसरों ने पहले ही घटिया अनाज खरीदा था, जिसे वितरित नहीं किया जा सकता था। रिकॉर्ड में सड़ गया दिखाकर उसे नष्ट कर दिया गया।
पड़ताल बताती है कि उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 2 साल में प्रदेश के सरकारी गोदामों में रखा 157 लाख टन अनाज सड़ गया, जिसकी अनुमानित कीमत पांच हजार करोड़ रुपए थी। इसमें 54 लाख टन गेहूं और 103 लाख टन चावल शामिल था।
आइए, हम इस घोटाले के नुकसान को गणितीय दृष्टिकोण से समझें:
1. **चावल (Rice)**: जैसा कि आपकी खबर में दिया गया है, चावल की कीमत सरकार 2800 रुपए प्रति क्विंटल होती है। इसके आधार पर, 157 लाख टन यानी 15 करोड़ 70 लाख क्विंटल चावल की कुल कीमत चार हजार 396 करोड़ रुपए होती है।
2. **गेंहूं (Wheat)**: गेंहूं का समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 1700 रुपए होता है। इसके आधार पर, 54 लाख टन यानी पांच करोड़ 40 लाख क्विंटल गेंहूं की कुल कीमत 918 करोड़ रुपए होती है।
इस घोटाले से सरकारी खजाने को कुल 144.36 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है¹।
यह घोटाला शराब कंपनियों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि अनाज के खराब होने से उन्हें औने-पौने दाम में खरीदने का मौका मिलता है, जिससे वे शराब और अन्य मादक पेय बनाने में उपयोग कर सकते हैं¹।
यह घोटाला गणितीय दृष्टिकोण से बड़ा है और इसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ है।





