मध्यप्रदेश में किसानों का शोषण जारी: 0% ब्याज योजना एक छलावा, लैंड पूलिंग एक्ट बना किसानों की जमीन छीनने का हथियार

भोपाल, मध्यप्रदेश – प्रदेश की मोहन यादव सरकार को सत्ता संभाले एक वर्ष से अधिक का समय हो गया है, लेकिन विधानसभा चुनाव 2023 में किए गए किसान हितैषी वादे अभी भी अधूरे हैं। इसके विपरीत सरकार किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ाकर और उनकी जमीनें जबरन अधिग्रहण करके उनका दोहरा शोषण कर रही है।
0% ब्याज योजना: सिर्फ चुनावी जुमला
राज्य सरकार हर साल किसानों के लिए 0 प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण योजना का प्रचार करती है, लेकिन यह सिर्फ एक “जूठा ढोल” है। हकीकत यह है कि इस योजना की आड़ में किसानों को आर्थिक जाल में फंसाया जा रहा है।
केसीसी ऋण (KCC Loan) की किश्त चुकाने की अंतिम तिथि 31 मार्च रखी गई है, जबकि रबी फसलों जैसे गेहूं और चना की सरकारी खरीदी अप्रैल-मई में शुरू होती है और भुगतान जून तक होता है। ऐसे में किसान समय पर ऋण चुका नहीं पाते और उन्हें 14-16% तक का भारी ब्याज देना पड़ता है।
विपक्ष के कई विधायकों, जिनमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार भी शामिल हैं, ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ऋण किश्त की अंतिम तिथि 31 मई तक बढ़ाने की मांग की, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
लघु और सीमांत किसान डिफॉल्टर बनने की कगार पर
मध्यप्रदेश में लगभग 1 करोड़ किसान खाता धारक हैं, जिनमें 75 लाख लघु और सीमांत किसान हैं। सरकार की इस हठधर्मिता से करीब 40 लाख किसान डिफॉल्टर बन चुके हैं या बनने की कगार पर हैं। कई किसानों ने बाजार से 2% से 10% मासिक ब्याज पर कर्ज लेकर अपनी किश्त भरी है।
जब फसल का पैसा आएगा, तो किसान पहले उस भारी ब्याज को चुकाएंगे और अगली फसल या परिवार के लिए उनके पास पूंजी नहीं बचेगी। इस चक्र में फंसकर किसान लगातार कर्जदार बनते जा रहे हैं।
किसान विरोधी लैंड पूलिंग एक्ट: जमीन हड़पने का नया तरीका
राज्य सरकार द्वारा लाए गए लैंड पूलिंग एक्ट को किसान संगठन “काला कानून” बता रहे हैं। इस कानून के तहत अब किसानों की जमीन अधिग्रहित करने के बाद उन्हें कोई प्रत्यक्ष मुआवजा नहीं दिया जाएगा, बल्कि 50% जमीन विकसित कर वापस की जाएगी।
यह एक्ट विशेष रूप से उज्जैन के सिंहस्थ आयोजन के लिए लाया गया है, लेकिन इसके जरिए पूरे प्रदेश में किसानों की जमीनें छीनी जा सकती हैं। किसानों की सहमति के बिना, और चार गुना मुआवजा दिए बिना यह अधिग्रहण कानूनन अन्यायपूर्ण है।
भूमि अधिग्रहण कानून का हो रहा खुला उल्लंघन
भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार, किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन मध्यप्रदेश में उन्हें केवल दो गुना या उससे भी कम मिल रहा है।
जो भूमि पांच वर्षों से अधिक समय से अधिग्रहीत है और अभी तक प्रयोजन हेतु उपयोग नहीं हुई है, उसे किसानों को वापस किया जाना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में किसानों को केवल FAR या भवन अनुज्ञा देकर उनका हक छीना जा रहा है।
कांग्रेस और किसान संगठन करेंगे बड़ा आंदोलन
मध्यप्रदेश किसान कांग्रेस ने ऐलान किया है कि यदि सरकार ने ऋण की अंतिम तिथि नहीं बढ़ाई और लैंड पूलिंग एक्ट को रद्द नहीं किया तो पूरे प्रदेश में किसान आंदोलन किया जाएगा।
कृषि संकट, कर्जमाफी, भूमि अधिग्रहण, और मुआवजा नीति जैसे विषयों पर सरकार का दोहरा रवैया अब किसान संगठनों और विपक्ष की अगली लड़ाई का मुद्दा बनेगा।





