
भोपाल: आज शाम, जब आप शुक्ल पक्ष चतुर्थी के अवसर पर पश्चिम दिशा में चंद्रमा की ओर नजरें उठाएंगे, तो आपको एक अद्भुत खगोलीय दृश्य देखने को मिलेगा। चंद्रमा का हंसियाकार भाग तो तेज चमक रहा होगा, लेकिन उसका बाकी हिस्सा भी हल्की चमक के साथ पूर्णता की झलक प्रस्तुत करेगा। यह खगोलीय घटना, जिसे ‘अर्थशाईन’ या ‘दा विंची चमक’ कहा जाता है, साल में केवल दो बार ही देखी जा सकती है।
अर्थशाईन की विशेषताएं:
– अर्थशाईन: चंद्रमा का अप्रकाशित भाग, जो पृथ्वी से परावर्तित सूर्य के प्रकाश से रोशन होता है।
– प्रतिशत परावर्तन: चंद्रमा सूर्य के प्रकाश का लगभग 12% परावर्तित करता है, जबकि पृथ्वी लगभग 30% प्रकाश परावर्तित करती है।
– दा विंची चमक: लियोनार्डो दा विंची ने 1510 के आसपास इस घटना की अवधारणा को स्केच के माध्यम से प्रस्तुत किया था।
अंतर्राष्ट्रीय नामकरण:
विदेशों में, इस घटना को ‘अशेन ग्लो’ या ‘नये चंद्रमा की बांहों में पुराना चंद्रमा’ के रूप में भी जाना जाता है।



