भिंड ग्वालियर हाईवे पर दर्दनाक हादसा: 10 साल के मासूम को डंपर ने कुचला, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

भिंड, मध्यप्रदेश । भिंड जिले में नेशनल हाईवे 719 एक बार फिर खूनी हाईवे साबित हुआ, जहां शनिवार दोपहर को दबोहा गांव के पास दर्दनाक सड़क हादसे में 10 वर्षीय मासूम रूपेंद्र भदौरिया की मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब रूपेंद्र अपने ताऊ और चचेरे भाई के साथ बाइक पर सवार होकर जा रहा था।

जानकारी के मुताबिक, मेंटेनेंस के लिए खोदी गई सड़क के चलते बाइक असंतुलित होकर फिसल गई। हादसे में बच्चा सड़क पर गिर पड़ा और पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर का पहिया उसके सिर पर चढ़ गया। हादसे के बाद मौके पर ही मासूम की मर्मांतक मृत्यु हो गई।

असुरक्षित हाईवे बना मौत का फंदा

यह हादसा सिर्फ एक मासूम की मौत नहीं, बल्कि सड़क प्रशासन की लापरवाही और सिस्टम की नाकामी की एक और शर्मनाक मिसाल बन गया है। हाईवे पर सड़क की मरम्मत का कार्य अधूरा पड़ा था और सुरक्षा इंतजाम नदारद थे। हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने हाईवे 719 पर चक्काजाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

स्थानीय लोगों ने कहा कि भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं इसे “खूनी हाईवे” में तब्दील कर चुकी हैं। शासन और प्रशासन की उदासीनता के कारण आए दिन मासूम जानें जा रही हैं, लेकिन सुधार की कोई कोशिश नजर नहीं आती।

सवालों के घेरे में प्रशासन और जनप्रतिनिधि

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं कि क्या भिंड-ग्वालियर हाईवे 719 की लापरवाह हालत ही मासूमों की मौत की जिम्मेदार नहीं? क्या स्थानीय नेता और अधिकारी समय रहते हाईवे को सुरक्षित नहीं बना सकते थे?

सड़क किनारे न तो कोई चेतावनी बोर्ड था, न ही कोई बैरिकेडिंग, और न ही निर्माणाधीन सड़क का कोई संकेत। प्रशासन की यह घातक चूक आज एक परिवार को उजाड़ गई।

नारा गूंजा – “भिंड ग्वालियर हाईवे सिक्स लेन बनाओ, नौजवानों का खून अब मत बहाओ”

हादसे के बाद लोगों ने एक सुर में आवाज़ उठाई –

> “भिंड ग्वालियर हाईवे सिक्स लेन बनाओ, नौजवानों का खून अब मत बहाओ!”

– पुखराज भटेले



यह नारा अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि जन-आक्रोश की पुकार बन चुका है। लोग चाहते हैं कि इस खूनी हाईवे का कायाकल्प हो और इसे सिक्स लेन बनाकर सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए।

निष्कर्ष:

भिंड-ग्वालियर हाईवे पर हर हादसा केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार की तबाही का प्रतीक है। अब वक्त है कि शासन, प्रशासन और राजनेता इस “खूनी हाईवे” की जिम्मेदारी लें और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

Exit mobile version