एम्स  के डॉ. अंशुल राय ने सिंगापुर में तंबाकू-सुपारी से होने वाली बीमारी पर रिसर्च प्रस्तुत की, ओएसएफ के इलाज में नई तकनीकों का किया विकास

भोपाल, । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के लिए एक बार फिर गौरव का क्षण रहा, जब डेंटल विभाग के डॉ. अंशुल राय और उनकी टीम ने सिंगापुर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तंबाकू और सुपारी से जुड़ी घातक बीमारी ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSF) पर आधारित अपना शोध 80 देशों के 2000 से अधिक विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया। इस शोध कार्य को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

क्या है ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSF)?

ओएसएफ एक गंभीर मौखिक स्थिति है, जिसमें मरीज के लिए मुँह खोलना कठिन हो जाता है और लंबे समय तक放ने पर यह मुँह के कैंसर में भी बदल सकती है। यह स्थिति विशेषकर उन लोगों में पाई जाती है जो लंबे समय से गुटखा, सुपारी और तंबाकू मिश्रित उत्पादों का सेवन कर रहे हैं।

शोध की प्रमुख बातें:

इलाज में किए गए नवाचार:

डॉ. राय और उनकी टीम ने महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के लिए अलग-अलग सर्जिकल प्रोटोकॉल विकसित किए। इसके अलावा, उन्होंने एक नया फिजियोथेरेपी प्रोटोकॉल भी डिजाइन किया जिससे मरीजों को मुँह खोलने में काफी राहत मिली। इस तकनीक से न केवल गति में सुधार हुआ बल्कि मरीजों को एक्सरसाइज के दौरान दर्द भी नहीं हुआ

इस इलाज प्रणाली की सफलता के चलते डॉ. राय को भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) से एक पेटेंट और 4 कॉपीराइट प्राप्त हुए हैं, जो चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मान्यता मानी जाती है।

प्रो. अजय सिंह का बयान:

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा:
“यह शोध कार्य न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के लिए भी एक अहम संदेश देता है। तंबाकू और सुपारी के सेवन से होने वाले खतरों को समझते हुए हमें जागरूकता और इलाज दोनों पर एक साथ काम करना होगा। डॉ. अंशुल राय और उनकी टीम ने जिस समर्पण और नवाचार के साथ इस चुनौतीपूर्ण विषय पर काम किया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है।”

एम्स भोपाल में अनुसंधान और नवाचार को मिलता है समर्थन

प्रो. अजय सिंह के नेतृत्व में एम्स भोपाल अकादमिक उत्कृष्टता और शोध नवाचार की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। संस्थान के संकाय सदस्य प्रेरित होकर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने शोध प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे भारत की चिकित्सकीय क्षमताएं वैश्विक स्तर पर उजागर हो रही हैं।

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