
हाईकोर्ट के फैसले ने कांग्रेस को दिखाया आइना – विधायक भगवानदास सबनानी के पक्ष में निर्णय
भोपाल । जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी के पक्ष में सुनाए गए फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रविंद्र यति ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को न तो न्यायपालिका पर भरोसा है और न ही जनता जनार्दन के फैसले पर।
हाईकोर्ट का फैसला: कांग्रेस की चुनाव याचिका खारिज
2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भोपाल के दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी भगवानदास सबनानी विजयी हुए थे। कांग्रेस प्रत्याशी पीसी शर्मा ने उनकी जीत को चुनौती देते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए।
रविंद्र यति का कांग्रेस पर प्रहार
रविंद्र यति ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेताओं की आदत बन गई है कि वे संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा:
कांग्रेस को जब हार का डर लगता है, तो वे पहले से ही ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगते हैं।
अगर कांग्रेस जीतती है तो ईवीएम सही होती है, लेकिन हारने पर वे अदालत में जाकर जनता के फैसले पर सवाल उठाने लगते हैं।
इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हमेशा न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान किया है।
कांग्रेस की न्यायपालिका पर अवमानना: आपातकाल का उदाहरण
यति ने इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि जब 1975 में अदालत ने इंदिरा गांधी को चुनाव के अयोग्य घोषित किया, तो उन्होंने देश पर आपातकाल थोप दिया था। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है कि जब भी उन्हें सत्ता से दूर किया जाता है, वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने लगते हैं।
“जनता कांग्रेस को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक देगी”
रविंद्र यति ने कांग्रेस को सलाह दी कि वे जनता के फैसले को स्वीकार करना सीखें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,
“यदि कांग्रेस अपनी आदतों में सुधार नहीं करती, तो जनता उन्हें इतिहास के कूड़ेदान में डालने में देर नहीं करेगी।”
निष्कर्ष
हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर भाजपा की जीत को वैध ठहराया है और कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया है। रविंद्र यति के बयान से स्पष्ट है कि भाजपा इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और कांग्रेस की न्यायपालिका व संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े कर रही है।





