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एम्स भोपाल में स्वच्छता पखवाड़ा 2025: स्वच्छ और स्वस्थ भारत की ओर एक पहल

भोपाल । एम्स भोपाल में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2025 तक स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। यह भारत सरकार की स्वच्छ भारत पहल का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अस्पताल परिसर में स्वच्छता को बढ़ावा देना और समुदाय को स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाना है।

स्वच्छता पखवाड़ा की शुरुआत और शपथ ग्रहण

इस अभियान की शुरुआत एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में हुई। उन्होंने संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों को स्वच्छता शपथ दिलाई, जिसमें स्वच्छ, हरित और प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाए रखने का संकल्प लिया गया। उन्होंने विशेष रूप से सिंगल-यूज प्लास्टिक (SUP) के उपयोग को कम करने और पुनः उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया, ताकि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

स्वच्छता पखवाड़ा 2025 के तहत प्रमुख गतिविधियाँ

1. श्रमदान एवं सफाई अभियान – अस्पताल एवं परिसर की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक श्रमदान।


2. वृक्षारोपण अभियान – पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़ लगाने की पहल।


3. सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों का टीकाकरण – स्वच्छता बनाए रखने में योगदान देने वाले योद्धाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।


4. स्वच्छता जागरूकता अभियान – कर्मचारियों, छात्रों और आगंतुकों को स्वच्छता के महत्व पर जागरूक करना।



एम्स भोपाल की स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता

प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा,
“स्वच्छता केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक आदत होनी चाहिए। यह पहल केवल अस्पताल परिसर की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समुदाय को जागरूक बनाना और एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना है। एम्स भोपाल स्वच्छ, हरित और सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थान बनने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।”

वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी

इस पहल में उपनिदेशक (प्रशासन) कर्नल (डॉ.) अजीत कुमार, डीन (एकेडमिक्स) (डॉ.) रजनीश जोशी, कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) शशांक पुरवार, सहायक चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंजन साहू तथा डॉ. बबीता रघुवंशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

स्वच्छता पखवाड़ा 2025: एम्स भोपाल की दिशा में एक और कदम

एम्स भोपाल की यह पहल स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वच्छ और सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के साथ-साथ, यह पहल समाज में जागरूकता और सहभागिता को भी प्रेरित कर रही है।

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