
भोपाल । विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस के अवसर पर डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में दो दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीमों ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
विशेष शिविर में हुई महत्वपूर्ण जांचें
शिविर में बच्चों की ग्रोथ, आंखों, कानों और थायराइड सहित अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांचें की गईं। इस वर्ष विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस की थीम “Improve Our Support Systems” पर केंद्रित रही।
डाउन सिंड्रोम: कारण, लक्षण और निदान
डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है, जिसमें बच्चों में छोटी नाक, बड़ी जीभ और छोटे कान जैसे शारीरिक लक्षण देखे जाते हैं।
मानसिक विकास में देरी, बोलने-चलने में कठिनाई और सीखने में परेशानी हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड और रक्त परीक्षण से इसका निदान संभव है।
जन्म के बाद भी शारीरिक परीक्षण और रक्त जांच से इसे पहचाना जा सकता है।
विशेष चिकित्सा और प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बन सकते हैं बच्चे
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी के अनुसार, डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों में सुनने-देखने की समस्या, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और हृदय रोग का खतरा अधिक होता है।
इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में निःशुल्क फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी और स्पेशल एजुकेशन सेवाएं उपलब्ध हैं।
संगीत, नृत्य, खेल और पेंटिंग जैसी गतिविधियों में डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।




