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एम्स भोपाल में शरीर दान जागरूकता एवं सम्मान कार्यक्रम सम्पन्न
चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरक पहल

भोपाल। एम्स भोपाल ने चिकित्सा शिक्षा, समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को नई दिशा देने के उद्देश्य से एनाटॉमी विभाग के सहयोग से शरीर दान जागरूकता एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शरीर दान करने वाले परिवारों के अमूल्य योगदान को सम्मानित करना और आम नागरिकों को शरीर दान के महत्व से अवगत कराना था।

शरीर दान—मानव सेवा का सर्वोच्च योगदान

कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने कहा कि शरीर दान एक अत्यंत पवित्र और मानवता की सेवा से जुड़ा कार्य है। उन्होंने धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और किसी भी उन्नत मॉडल से प्राकृतिक मानव शरीर का अध्ययन प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता ने कहा कि शरीर दान मेडिकल शिक्षा की आधारशिला है, क्योंकि यह छात्रों को वास्तविक एनाटॉमिक संरचना को समझने में मदद करता है, जो उनके क्लिनिकल प्रशिक्षण के लिए अनिवार्य है।

परिवारों और संस्थाओं का सम्मान, छात्रों की प्रेरक प्रस्तुति

इस कार्यक्रम में शरीर दान करने वाले दिवंगत व्यक्तियों के परिवारों और सहयोगी सामाजिक संगठनों (NGO) का सम्मान किया गया। कई परिवारों ने अपने भावपूर्ण अनुभव साझा किए, जिससे शरीर दान के सामाजिक, शैक्षणिक और मानव सेवा से जुड़े गहरे प्रभाव उजागर हुए। एनाटॉमी विभाग की प्रमुख डॉ. बर्था ए. डी. रथिनम, डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी और उप निदेशक (प्रशासन) संदेश कुमार जैन ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। एमबीबीएस छात्रों ने शरीर दान के महत्व और उससे होने वाले सामाजिक व शैक्षणिक लाभों को दर्शाने के लिए एक जागरूकता नाटिका भी प्रस्तुत की।

जनभागीदारी का आह्वान

एम्स भोपाल ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे शरीर दान के लिए जागरूक हों और पंजीकरण कर मानव सेवा तथा चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने में योगदान दें। संस्थान का मानना है कि शरीर दान से भावी चिकित्सकों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा और शोध कार्य को नई दिशा मिलेगी।

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