
लोकायुक्त ऑफिस में साजिशन लगी आग!
भोपाल । रविवार को भोपाल में लोकायुक्त कार्यालय परिसर में लगी आग को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने साजिश की आशंका जताई है। भोपाल में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने आवास पर मीडिया से चर्चा में कहा- लोकायुक्त कार्यालय में सिंहस्थ घोटाले की जांच की एक फाइल है। जिसमें सैकड़ों एकड़ जमीन की हेराफेरी हुई। कई नेताओं के करीबियों और कंपनियों के नाम हैं। लोकायुक्त कार्यालय में लगी आग में कहीं सिंहस्थ की उस फाइल को जलाने की कोशिश तो नहीं की गई। सिंघार ने आग लगने के मामले की ज्यूडिशियल जांच कराने की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में आग का दौर चल रहा है। पहले सतपुड़ा भवन, वल्लभ भवन में लगी। अब लोकायुक्त कार्यालयमें आग लगना भी महत्वपूर्ण है। बताने को बहाने बहुत हैं कि शॉर्ट सर्किट हो गया, ट्रांसफार्मर जल गया। लेकिन, लोकायुक्त की जिस प्रकार से नियुक्ति हुई। शनिवार को आदेश हुआ और रविवार को शपथ दिलाई गई। आनन-फानन में तत्काल नया लोकायुक्त नियुक्त किया गया। इसके पीछे क्या कारण है। क्योंकि, इस बारे में सुप्रीम कोर्ट भी गया हूं। कहीं न कहीं, सरकार डरी हुई है कि सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ निर्णय न दे दे।
अधिकारियों ने घबराहट में फाइलें जलाने की कोशिश की
उमंग सिंघार ने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार लोकायुक्त कार्यालय में सिंहस्थ की भी एक फाइल थी। सिंहस्थ में सैकड़ो एकड़ जमीन में हेराफेरी की गई। इसमें उन कंपनियों के नाम भी थे। कहीं ऐसा तो नहीं कि उन फाइलों को जलाने के लिए यह आग लगाई गई। ऐसे जो अधिकारी थे, जो इस घबराहट में थे कि अगर इसमें जांच होगी तो हम लोग भी इसकी गिरफ्त में आएंगे। मैं समझता हूं यह गंभीर विषय है इसकी जांच होनी चाहिए। चूंकि, मुख्यमंत्री जी जिस प्रकार से स्ढ्ढञ्ज गठित करते हैं और उसकी लीपा-पोती करते हैं। अब तक की जो जांचें हुई है मुझे नहीं लगता कि इसकी निष्पक्ष जांच होगी। लेकिन, मैं कांग्रेस विधायक दल की ओर से कहना चाहता हूं कि इसको विधानसभा में उठाया जाएगा। और प्रदेश में कई घोटाले हो चुके हैं उनकी लंबी लिस्ट है इन घोटालों को लेकर अभी तक सही स्पष्ट जांच पटल पर जनता के सामने क्यों नहीं आ रही?
डीन की नियुक्तियों में गड़बड़ी
नेता प्रतिपक्ष ने मप्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्तियों और पिछले साल कायाकल्प अभियान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई खरीदी पर भी सवाल उठाए। उमंग सिंघार ने कहा मैंने समाचारों में देखा कि डीनों की नियमों के विरुद्ध फर्जी भर्ती हो गई है। इसके पहले कायाकल्प अभियान में करोड़ों रुपए आया था। स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त की थी। जिलों के अस्पतालों में डिमांड नहीं थी इसके बावजूद सबको फर्नीचर दिया गया। यह भी एक बड़ा घोटाला है। यह सारी फाइलें लोकायुक्त की लाइन में थीं। वहां पर आग लगना ही मूल कारण है कि इन मामलों को दबाने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है। विशेष रूप से अलग से समिति गठित होनी चाहिए चाहे जुडिशल जांच होनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि सरकार निष्पक्ष रूप से कार्रवाई करे।
जल-जीवन मिशन में हुआ 20 हजार करोड़ का घोटाला
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गर्मी के मौसम में नौतपा का दौर चल रहा है। पिछले विधानसभा सत्र में मैं यह मुद्दा उठा चुका हूं और इस बार भी उठाऊंगा कि जल जीवन मिशन में 20000 करोड़ का घोटाला हुआ। दो-दो करोड़ की पाइपलाइन फूट गई। 6 महीना के अंदर ठेकेदार 40 -50 पर्सेंट कमीशन देकर पैसे निकाल कर निकल गए। उस पर सरकार ने अब तक जांच क्यों नहीं कराई? यह गंभीर विषय है कि आज प्रदेश के अंदर पानी का संकट है। कई किलोमीटर जाकर महिलाओं को पानी लेना पड़ रहा है।



