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दक्षिण अफ्रीकी टीम अब भी बदल नहीं पायी दबाव में बिखरने की आदत

क्लूजनर से क्लासेन तक वही कहानी टीम ने फिर दोहरायी
मुम्बई । दक्षिण अफ्रीकी टीम एक बार फिर दबाव में बिखरने के मिथक को गलत साबित नहीं कर पायी है। टीम को लेकर बड़े मुकाबले में दबाव के बीच बिखरने की जो बातें कहीं जाती रही हैं। वे एक बार फिर टी20 विश्वकप में सही साबित हुई हैं। दक्षिण अफ्रीकी टीम इस टूर्नामेंट में सभी मैच जीतकर फाइनल में पहुंची थी पर इसे बाद भी उसे करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इस हार से दक्षिण अफ्रीकी प्रशंसकों के मस्तिष्क में लांस क्लूजनर की यादें फिर ताज हो गयी हैं। ये भी साफ हो गया है कि क्लूजनर से हेनरिक क्लासेन तक हालात नहीं बदले हैं। इसी कारण उसने हाथ में आया हुआ मैच खो दिया। दक्षिण अफ्रीकी टीम को अंतिम 30 गेंदों पर 30 रन की जरूरत थी और 6 विकेट हाथ में थे। उस समय हेनरिक क्लासेन आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे थे। 15वां ओवर में उन्होंने एक ही ओवर में एक ओवर में 24 रन बना लिए। इसके बाद टीम की जीत करीब लगने लगी थी।
मैच के 16वें ओवर तक मैच अफ्रीकी टीम के हाथों में था पर 17 वें ओवर में क्लासेन के आउट होते ही अफ्रीकी टीम की पकड़ मैच से ढ़ीली होने लगी।
दक्षिण अफ्रीका की टीम के पास हमेशा से अच्छे बल्लेबाज ओर गेंदबाज रहे हैं पर इसके बाद भी वह अहम मुकाबलों में गलतियां कर देती है। अब तक खेले गए कुल 18 एकदिवसीय और टी-20 विश्व कप में अफ्रीकी टीम पहली बार फाइनल मुकाबले तक पहुंच पाई। वहीं 7 बार उसे सेमिफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। इसमें 1999 के एकदिवसीय विश्वकप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर जीत के लिए टीम को अंतिम ओवर में 9 रनों की जरूरत थी और उसका आखिरी विकेट ही बचा था। तब ऑलराउंडर लांस क्लूजनर के साथ तेज गेंदबाद एलन डोनाल्ड खेल रहे थे। क्लूजनर ने अंतिम ओवर की पहली 2 गेंदों पर 2 चौके लगाकर स्कोर बराबर कर दिया। इस प्रकार उसे जीत के लिए 4 गेंदों पर केवल एक रन की जरुरत थी। टीम के प्रशंसक जश्न तक मनाने लग गये थे। तभी चौथी गेंद पर क्लूजनर ने तेजी से रन लेने के प्रयास किये पर डोनाल्ड रन आउट हो गये। इस तरह ये मैच टाई रहा था और एक बार फिर जीत उसे हाथों से फिसल गयी थी।

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