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नींद में खरटि आना हो सकता है उच्च रक्त चाप का कारण : डॉ. अभिषेक गोयल

भोपाल । राजधानी में बुधवार को अरेरा कालोनी स्थित परिवार नियोजन एवं समन्वय संगठन एप्को के सभागार में नेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स एंड एनवायरनमेंट कन्ज्यूमर एवं कन्ज्यूमर वॉइस, नई दिल्ली द्वारा आयोजन किया गया जिसका प्रमुख विषय नींद में साँस की रुकावट और उच्च रक्त चाप रहा।

इस बीमारी से सोते समय माँस में अवरोध या ऑब्सट्रक्टिव स्वीप एपनिया एप्रिया एक गंभीर विकार है जिसमे सोते-सोते नींद में ही इंसान की साँस रुक जाती है। इसी बीमारी से सुप्रसिद्ध संगीतकार बप्पी लाहिरी की नींद में ही मौत होगई। इसके अलावा अमरीका के 27वें राष्ट्रपति विलियम होवार्ड टेफ्ट भी इसी विकार से जान गंवा चुके हैं।

वैसे तो इस बीमारी का पता 360 ईसा पूर्व पता चल गया था किंतु विस्तार से इस पर तवज्जो पिछले कुछ सालों से दी जारही है। इस विकार से प्रभावित कुछ महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ में फांसीसी नामक नेपोलियन बोनापार्ट, इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अमरीकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन रुजवेल्ट और थिओडोर रूजवेल्ट, ब्रिटेन के सम्राट हेनरी VIII और महारानी विक्टोरिया आदि।

रिपोर्ट के मुताबिक स्लीप एप्रिया दुनिया में 100 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। भारत में तकरीबन 25% वयस्क पुरुष OSA की समस्या से जूझ रहे हैं यानी हर बार में से एक वयस्क पुरुष महिलाएं भी इससे बची नहीं हैं। स्लीप एप्रिया की वजह से हृदय रोग, हार्ट फेलियर हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर), मोटापा और स्ट्रोक जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख और स्लीप स्पेशलिस्ट डॉ. अभिषेक गोयल ने बताया कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्रिया या नींद में साँस की रुकावट गले की मांसपेशियों द्वारा सांस की नली को अवरुद्ध (ब्लॉक) करने की वजह से होता है जिसके कारण सोते समय खर्राटे आने और माँस लेने में तकलीफ के लक्षण दिखाई देते हैं। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जो दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है- जैसे हाइपरटेंशन और हार्ट अटैक

इसके गंभीर मामलों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी से मस्तिष्क को भी नुकसान हो सकता है जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। इसका सीधा असर दिन में अत्यधिक थकान होना, दिन में ज्यादा नींद आना, याददाश्त कमजोर होना, एकाग्रता में कठिनाई और चिडचिडापन हो सकता है।

डॉ. गोयल कहते हैं कि OSA के रोगियों में सामान्य आबादी की तुलना में सड़क दुर्घटना का जोखिम अधिक होता है क्योंकि वाहन चलाते समय व्यक्ति अपने आसपास की गतिविधियों के प्रति सतर्क नहीं रह पाता।

OSA के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी), मेटाबोलिज्म, इन्सुलिन प्रतिरोध और लिपिट असामान्य होने लगता है। OSA के बहुत कारण है जिनमें बढ़ता मोटापा या अत्यधिक बजन प्रमुख है। मोटापा बढ़ने से सांस की नली में रुकावट होने लगती है। स्लीप एशिया किसी भी उम्र में हो सकता है यहाँ तक कि बच्चों को भी ये अपनी गिरफ्त में लेता है।

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