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अमेरिका में आए तेज भूकंप के झटके, लोग घरों से बाहर भागे

वाशिंगटन । अमेरिका के हवाई में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। कई लोग डर के कारण घरों से बाहर निकले और सड़क पर आ गए। 5.7 की तीब्रता वाले इस भूकंप में राहत की बात ये रही सुनामी जैसा कोई खतरा नहीं है।

यूएसजीएस के मुताबिक भूकंप के ये झटके शुक्रवार की देर रात 11 बजकर 24 मिनट पर महसूस किए गए थे। भूकंप का केंद्र ओक्लाहोमा से 8 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में प्राग में ओक्लाहोमा सिटी से लगभग 57 मील (92 किलोमीटर) पूर्व में केंद्रित था। अमेरिकी भूकंपविज्ञानियों ने बताया कि शुक्रवार को हवाई में जोरदार भूकंप आया, लेकिन सुनामी का कोई खतरा नहीं है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा कि 5.7 तीव्रता का भूकंप हवाई के मुख्य द्वीप पर पाहाला के पास आया, जिसका केंद्र पृथ्वी की सतह से लगभग 37 किलोमीटर (23 मील) नीचे था। एक वेबसाइट ने यूएसजीएस के हवाले से बताया कि भूकंप पूरे मुख्य द्वीप पर महसूस किया गया। एजेंसी ने कहा कि जान-माल के नुकसान की संभावना कम है।

इससे पहले, पिछले हफ्ते ही अमेरिका के ओक्लाहोमा प्रांत में भूकंप आया था। अमेरिका के ओक्लाहोमा में पिछले शुक्रवार रात को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (यूएसजीएस) के मुताबिक, रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गयी थी। भूकंप के तेज झटके के बाद अगले कई घंटों तक कम तीव्रता के कई झटके महसूस किए गए थे। लिंकन काउंटी के उप आपातकालीन प्रबंधन निदेशक चार्लोट ब्राउन के अनुसार भूकंप के कारण किसी के घायल होने की सूचना नहीं है और क्षति न्यूनतम दिखी। भूकंप के झटकों के कारण ज्यादातर वस्तुएं घरों के अंदर अलमारियों से उलट गईं अथवा हिल गईं। चार्लोट ब्राउन ने कहा, ‘‘कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं। बहुत सारे डरे हुए लोगों के अलावा कुछ भी नहीं। बता दें कि विशाल टेक्टोनिक प्लेट के बीच में होने के बावजूद भी हवाई शहर धरती का भूकंपीय रूप से सक्रिय हिस्सा है। यहां किलाउआ सहित 6 सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं। जो कि पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं, जो हेलीकॉप्टर से हवाई के बिग आइलैंड पर इसका नजारा देखने आते हैं। इतना ही नहीं, यह दुनिया के सबसे बड़े ज्वालामुखी मौना लोआ का भी स्थान है। यह ज्वालामुखी साल 2022 में जब फटा था तो एक सप्ताह तक शांत नहीं हुआ था। तब यह चार दशकों में पहली बार फूटा था। तब इसमें से 60 मीटर (200 फीट) ऊंचाई तक लावा के फव्वारे उठे थे, जिससे पिघले हुए लावा की नदियां बहने लगी थीं।

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