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रोका जा सकता था पटवारी भर्ती परीक्षा घोटाला : सुरजेवाला

भोपाल : पुरानी कहावत है, पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं, 2004 में भाजपा की सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश के युवाओं के भविष्य की बोली लगाना प्रारंभ कर दी थी जो आज तक भी जारी है। चाहे वो व्यापम घोटाला हो, डीमेट घोटाला हो, शिक्षक भर्ती घोटाला हो, नर्सिंग घोटाला हो या पटवारी भर्ती घोटाला, भाजपा ने प्रदेश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को घोटालों की भेंट चढ़ा दिया है। 

23 भर्ती प्रवेश परीक्षाओं में 1 करोड़ युवाओं के भविष्य की बोली लगाई- व्यापम घोटाला

व्यवसायिक परीक्षा मंडल का पहला फर्जीवाड़ा खंडवा में 12 जून 2004 को सामने आया था, उसके बाद अपराध क्र. 129/06 छतरपुर में 2006, फिर 9/11/09 अपराध क्रमांक 728/09 एमपी नगर, भोपाल, अपराध क्रमांक 523/11 तुकोगंज इंदौर में 24/7/2011, फिर 2013 में निशातपुरा भोपाल अपराध क्रमांक 508/13। कहने का आशय यह है कि 2004 से ही भाजपाई सत्ता की सरपरस्ती में व्यवसायिक परीक्षा मण्डल में घोटाले किये जा रहे थे। 23 प्रकार की भर्ती-प्रवेश परीक्षाओं में 1 करोड़ युवाओं का भविष्य बेचा गया। 

व्यापम से बड़ा डीमेट घोटाला

व्यापाम के साथ ही डीमेट घोटाला भी सामने आया, जिसमें डेन्टल और मेडिकल टेस्ट के नाम पर 6 निजी मेडिकल और 16 निजी डेन्टल कॉलेजों की सारी सीटें 50 लाख रू. से लेकर 1.50 करोड़ रूपये बेच दी गईं। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे में सीबीआई ने कहा कि डीमेट घोटाला व्यापम से भी बड़ा घोटाला है और हम इसकी जाँच भी नहीं कर सकते। 

युवाओं के भविष्य को नर्क में डाला – नर्सिंग घोटाला

मप्र में संचालित फर्जी नर्सिंग कालेज का घोटाला इतना व्यापक और बड़ा है कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। मप्र में 695 नर्सिंग कॉलेज संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें 3 साल से परीक्षाएं स्थगित हैं और 1.50 लाख बच्चों का भविष्य अंधकार में डाल दिया गया है। उच्च न्यायालय को यह तक कहना पड़ा कि हैरत है कि नर्सिंग का एन न जानने वालों को भी परीक्षा की इजाजत दी गई। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रदेश में चल रहे छद्म कालेज समाज में जहर घोल रहे हैं और कई ऐसे नर्सिंग कॉलेजों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। 

पटवारी भर्ती परीक्षा का सच जानेंगे तो सन्न रह जायेंगे

22 नवम्बर, 2022 को कर्मचारी चयन मंडल ने ग्रुप-2, सबग्रुप-4, और पटवारी की संयुक्त परीक्षा के लिए नोटिस जारी किया था। छात्रों ने 5 जनवरी से 19 जनवरी 2023 तक फार्म भरे, पटवारी भर्ती परीक्षा में लगभग 9,78,266 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। इसकी परीक्षा 15 मार्च से 25 अप्रैल 2023 तक ली गई। यह परीक्षा प्रदेश के 78 परीक्षा केंद्रों पर ली गई, 30 जून 2023 को इसका रिजल्ट जारी किया गया, इसमें लगभग 8,600 अभ्यार्थियों का चयन हुआ। 

 

जब 10 दिन बाद मेरिट लिस्ट आयी तो पता लगा कि 10 में से 7 अभ्यार्थियों का परीक्षा सेंटर एक ही कॉलेज में था और कॉलेज भाजपा के विधायक का है। कई अभ्यर्थी ऐसे भी थे जो वनरक्षक भर्ती परीक्षा में फिट थे, जबकि उन्होंने पटवारी भर्ती परीक्षा में खुद को विकलांग बताया और विकलांग कोटे में उनका चयन हुआ।  

व्यापक रूप से 15-15 लाख रूपये लेकर पटवारी भर्ती परीक्षा में घोटाले की बात सामने आने लगी। मप्र के मुख्यमंत्री ने 19 जुलाई 2023 को ट्वीट करके बताया कि पटवारी भर्ती परीक्षा की जाँच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधिपति श्री राजेन्द्र कुमार वर्मा जी द्वारा की जायेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर यथोचित अनुशंसाएं 31 अगस्त 2023 तक राज्य शासन को प्रस्तुत होंगी, जबकि सच्चाई यह है कि जाँच रिपोर्ट आज तक नहीं आयी है, और सरकार ने पटवारी भर्ती घोटाले पर पर्दा डाल दिया। 

4 अप्रैल 2023 को ही पकड़ में आ गया था पटवारी भर्ती घोटाला

पटवारी भर्ती घोटाला 4 अप्रैल 2023 को ही पकड़ में आ गया था, मगर उसके बावजूद भी 25 अप्रैल, 2023 तक पटवारी भर्ती परीक्षाएं ली गई और 4 अप्रैल, 2023 को पकड़ाये पटवारी भर्ती घोटाले पर पर्दा डाला गया। 

4 अप्रैल को ग्वालियर क्राईम ब्रांच को यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि मनीष शर्मा पिता मदन मोहन शर्मा, निवासी थाटीपुर, जिला ग्वालियर तथा वीरभान बंसल पिता महेन्द्र सिंह बंसल निवासी थाटीपुर, जिला ग्वालियर, बंसल ऑफ़सेट, मयूर मार्केट, थाटीपुर पर आधार कार्ड के बायोमेट्रिक डेटा में मोम का इस्तेमाल कर और कम्प्युटर का इस्तेमाल कर व्यापक रूप से पटवारी भर्ती परीक्षा घोटाले को आकार दे रहे हैं। जिसका अपराध क्रमांक 29 वर्ष 2023, धारा 419, 420, 467 के साथ में धारा 511 लगाकर अपराध पंजीबद्ध किया गया। मगर ऐसा प्रतीत होता है कि बड़े राजनेताओं और कर्मचारी चयन मंडल (व्यापम) के बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए धारा 511 को जोड़ा गया, अर्थात् अपराध के प्रयास की धारा जोड़कर चुपचाप चालान भी पेश कर दिया गया, ताकि बड़े सफेदपोशों को बचाया जा सके। 

पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में लिखा है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ में उनके द्वारा बताया गया कि वे लोग वर्तमान में चल रही मप्र पटवारी भर्ती परीक्षा के वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर सॉल्वर बिठाने के लिए वास्तविक परीक्षार्थी के आधार कार्ड में सेव अंगुल चिन्ह में से परीक्षार्थी के हाथ के दोनों अंगूठों के स्थान पर सॉल्वर के दोनों अंगूठों से बदलने का प्रयास कर रहे हैं। उक्त आरोपियों से मौके पर डेल कंपनी का लैपटॉप, मार्फो कंपनी की लाल काले रंग की दो बायोमेट्रिक मशीन तथा तीन सफेद मोम जैसे पदार्थ के अंगूठे के आकार के अंगुल चिन्ह जब्त किये गये। 

सवाल यह उठता है कि जब 4 अप्रैल 2023 को ही पटवारी भर्ती परीक्षा में व्यापक घोटाले के प्रमाण मिल गए थे, तो भी पटवारी भर्ती परीक्षा जारी रखकर घोटाला होने दिया गया। सरकार से पाँच सवाल:

1. जब 04 अप्रैल, 2023 को ही पटवारी भर्ती घोटाला सामने आ गया था, तो प्रदेश स्तर पर इसकी व्यापक जाँच क्यों नहीं की गई?

2. क्या पटवारी भर्ती घोटाला सरकार के संरक्षण में किया जा रहा था?

3. 04 अप्रैल के फ़र्ज़ीवाडे को क्यों छिपाया गया? और क्या गुपचुप चालान पेश कर दिया गया?

4. 18 साल से युवाओं के भविष्य को बेचने का यह गोरखधंधा क्यों चलाया जा रहा है?

5. 15 मार्च से 4 अप्रैल 2023 के बीच कितने फर्जी सोल्वर पटवारी भर्ती परीक्षा में 

बिठाये गये ? पटवारी भर्ती घोटाले की जाँच का सच अब तक क्यों सामने नहीं आया?

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