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धान घोटाला! गुजरात की कंपनी ने लगाया 100 करोड़ का चूना

भोपाल । प्रदेश में आए दिन घोटाले और हेराफेरी के नए मामले सामने आ रहे है। भ्रष्टाचार के मामले में प्रति दिन सरकार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। अब एक और घोटाले का चौकाने वाला मामला सामने आया है। धान का रखरखाब कर रही गुजरात की कंपनी ने लगभग 100 करोड़ का घोटाला किया है। दरअसल गुजरात की अहमदाबाद स्थित गोग्रीन वेयरहाउसेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सरकार के वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन ने रीवा जबलपुर और शहडोल संभाग में धान के भण्डारण, रखरखाव एवं सुरक्षा हेतु पीएमएस योजना अंतर्गत ओपन केप संचालित करने का ठेका दिया था। कंपनी को लगभग 11,68,589 मेट्रिक टन धान के रखरखाव के बदले सरकार प्रतिमाह 56.89 रुपये प्रति मेट्रिक टन दे रही है । यानि 11,68,589 मेट्रिक टन धान के लिए सरकार द्वारा कंपनी को 6 करोड़ 65 लाख रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है। कंपनी को यह टेंडर 2 साल के लिए दिया गया था । खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में कंपनी द्वारा विभिन्न केपों पर धान का भण्डारण कराकर केपं कार्य संचालित किया गया। ओपन केप संचालन के दौरान कंपनी को धान के स्कंध की 2% की क्षति की छूट दी गई थी। लेकिन सरकार को धान भुगतान के बाद फील्ड से विभिन्न माध्यमों से भंडारित धान की गुणवत्ता संबंधित शिकायत मिली। जाँच के बाद पाया गया की कंपनी ने 2% लॉसगेन के अतिरिक्त दो साल में लगभग 4.11 धान का लॉसगेन दर्शाकर सरकार को 80 करोड़ का चूना लगा दिया। वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन ने नुकसान के लिए कंपनी को पत्र लिखा। पत्र में कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। सरकार ने इसकी भरपाई के लिए कंपनी को वसूली का नोटिस थमा दिया। । सरकार के नोटिस के बाद कंपनी कोर्ट चली गई। कोर्ट ने सरकार के कंपनी से वसूली के आदेश पर स्टे दे दिया। अब मामला कोर्ट में चल रहा है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में सरकार को 80 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। –

2% की जगह 4.11% का नुकसान बड़ी धांदली धान के रखरखाव में वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन द्वारा 2% अनाज नुकसान की छूट दी जाती है। यह छूट काफी ज्यादा होती है। इसके बावजूद कंपनी द्वारा 4% से अधिक का नुकसान बड़े घोटाले का संकेत दे रहा है। कंपनी ने 2% की जगह 6% से अधिक का नुकसान दिखाकर 80 करोड़ रुपये अपनी जेब में डाल लिए। कोर्ट में स्टे के बाद सरकार हाथ मालती रह गई है।

-विपक्ष ने कहा ये सोची समझी साजिश कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सरकार की सोची समझी साजिश बताया है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता का कहना है कि गुजरात की कंपनियों ने मध्यप्रदेश में लूट मचा रखी है। ये कंपनिया बड़े से लेकर छोटे-छोटे ठेके तक ले रही है। वही सरकार के अधिकारियों ने भी भ्रष्टाचार का नया सिस्टम बना लिया है। पहले साठगांठ कर भ्रष्टाचार करो फिर पूरे मामले को वर्षो तक कोर्ट में चलते रहो। गुप्ता ने कहा कि सरकार के ऐसे कई केस कोर्ट में पेंडिंग है। सरकार के अधिकारी पहले गड़वड़ झाला करते है फिर बसूली का नोटिस निकालकर इतिश्री कर लेते है। -कंपनी के डायरेक्टर संतोष साहू ने झाड़ा पल्ला इस पूरे मामले को लेकर एक्सप्रेस न्यूज़ ने जब कंपनी के डायरेक्टर संतोष साहू ने इस पूरे मामले को लेकर उनका पक्ष जानना चाहा था उन्होंने कहा कि पूरा मामला कोर्ट में चल रहा है। हमने कोर्ट में अपना जवाब दे दिया है। अब कोर्ट इस पूरे मामले में अपना निर्णय लेगा।

-आखिर क्यों किया गया काम आउटसोर्स पूर्व में कैप में रखें अनाज का रखरखाव वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा ही किया जाता था लेकिन 2021-22 से यह काम आउटसोर्स करने की पॉलिसी बनाई विभागीय सूत्रों की मानें तो यह आउट सोर्स कार किसी उच्च अधिकारी के दबाव पर ही किया गया अन्यथा पिछले कई वर्षों से कॉरपोरेशन के कर्मचारी इस काम को बिना नुकसान के कर रहे थे ।

इनका कहना है
कारपोरेशन ने इस मंशा से काम आउटसोर्स किया था जिससे कॉर्पोरेशन को लगने वाली लागत कम हो सके

दीपक सक्सेना, एमडी, वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन

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