
मिर्जापुर में एक पुलिस अफसर की कथित दबंगई और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय चश्मा दुकानदार से बहस के दौरान थ्री स्टार वर्दीधारी अधिकारी ने कहा—”पैसे नहीं देंगे, जो करते बने कर लीजिए”। यह पूरा घटनाक्रम दुकान में लगे सीसीटीवी और मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है मामला?
रमई पट्टी बाजार स्थित एक चश्मा दुकान पर शुक्रवार को एक पुलिस अधिकारी—जो कि थ्री स्टार वर्दी में थे और ‘इंस्पेक्टर’ रैंक के बताए जा रहे हैं—अपना चश्मा ठीक करवाने आए थे। दुकानदार के अनुसार, उन्होंने चश्मे में नया शीशा लगवाया, जिसकी कीमत ₹800 बताई गई।
जब दुकानदार ने विनम्रता से बिल की राशि मांगी, तो अधिकारी ने पहले रूखे अंदाज़ में जवाब दिया। दुकानदार ने कहा, “देखिए सर, तमीज से बात करिए।” इस पर अफसर ने रौब झाड़ते हुए कथित तौर पर कहा—”पैसा नहीं देंगे, जो करते बने कर लीजिए।”
दुकानदार की प्रतिक्रिया
दुकानदार ने बताया, “मैंने बस इतना कहा कि आप भाषा का इस्तेमाल सही करें। ₹800 का बिल था, लेकिन वह बिना दिए ही चले गए और जाते-जाते धमकीनुमा लहजे में यही बात कह गए।”
दुकानदार के अनुसार, इस तरह की हरकत न केवल असंवैधानिक है बल्कि पुलिस की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है। “अगर कानून के रक्षक ही कानून को ताक पर रखेंगे, तो आम नागरिक क्या उम्मीद करें?” उन्होंने दुख जताते हुए कहा।
वीडियो वायरल, लोगों में आक्रोश
घटना के बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। बाजार में मौजूद लोगों ने इसे अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर लिया था। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद आम लोगों में गुस्सा है। कई यूजर्स ने पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की है और सवाल उठाया है कि क्या वर्दी का मतलब आम आदमी को धमकाना है?
पुलिस प्रशासन की चुप्पी
अब तक पुलिस विभाग या संबंधित अधिकारी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ते जनदबाव के चलते प्रशासन को इस मामले में जांच करनी पड़ सकती है।
निष्कर्ष:
मिर्जापुर की यह घटना यह दर्शाती है कि जब अधिकारों के साथ जिम्मेदारी न हो, तो प्रशासनिक व्यवस्था में आम जनता का भरोसा डगमगाने लगता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करता है या यह मामला भी सिस्टम की चुप्पी में खो जाता है।





