National

भारतीय रेलवे में कर्मचारियों की भारी कमी से संकट, ट्रेन हादसे बढ़े

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे इस समय लाखों कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेन हादसे बढ़ रहे हैं और यात्री टॉयलेट में सफ़र करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। रेलवे की इस बदहाल स्थिति का जिम्मेदार कौन है?

ऑल इंडिया रनिंग लोको स्टाफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एस.एस. ठाकुर ने कहा, “मालगाड़ी का लोको पायलट चार रातों से सोया नहीं था, जबकि नियम के अनुसार अधिकतम लगातार दो रात ड्यूटी की अनुमति है।” उनकी यह बात रेलवे में हो रही गलतियों और बढ़ते हादसों की ओर इशारा करती है। उन्होंने रेलवे से इन गलतियों से सबक लेने और भविष्य में उनकी पुनरावृत्ति रोकने के उपाय करने की अपील की।

एक्स हैंडल पर युवक कांग्रेस के सदस्य शुभम शर्मा ने इस हादसे के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लिखा, “70 साल के राज में अगर कुछ अच्छा काम किया होता, तो आज यह स्थिति नहीं होती। मोदी जी ने पिछले 10 सालों में रेलवे की हालत में सुधार किया है और रेल हादसे पहले से 70 प्रतिशत कम हुए हैं।”

वहीं, रुकुम केश ने लिखा, “नयी भर्ती नहीं हो रही है, एक कर्मचारी चार कर्मचारियों के बराबर काम कर रहा है। वर्कलोड बढ़ने से दुर्घटनाएं होंगी ही। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।”

सुरेश ने व्यंग्य करते हुए लिखा, “अडानी पोर्ट का सस्ता पाउडर लेकर पूरी सत्ता मदमस्त है।”

कुमार अशोक ने लिखा, “मैंने पहले ही कहा था कि इनके बस की बात नहीं है, रेल चलाने की।”

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बताया कि रेलवे में 3.12 लाख से ज्यादा पद रिक्त हैं। लोको पायलट के करीब 20.5% और सहायक लोको पायलट के 7.5% पद रिक्त हैं, जिससे कर्मचारियों पर दबाव बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 2.70 करोड़ यात्री वेटिंग लिस्ट के कारण यात्रा नहीं कर पाए।

भारतीय रेलवे को इन समस्याओं से निपटने और कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और रेलवे की स्थिति में सुधार हो सके।

Related Articles