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करीब 80 फीसदी विश्व प्रसिद्ध शाही लीची बर्बाद, गर्मी की नजर लगी

मुजफ्फरपुर । मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची को इस बार गर्मी की नजर लग गई है। गर्मी का असर इस बार शाही लीची पर खूब पड़ा, जिससे किसानों में निराशा है। किसानों के मुताबिक असमय बारिश, तूफान, पकने के समय सामान्य से अधिक तापमान रहने से करीब 80 फीसदी लीची बर्बाद हो गई है।
मौसम से प्रभावित लीची वाले किसान ने बताया कि हम लोग जो लीची बाहर भेज रहे हैं उसका गलत रिव्यू आ रहा है। यह पहली बार है कि हम लोग काफी नुकसान में हैं। मार्केट में हमें बिलकुल भी सही भाव नहीं मिल रहा है। अब तो बागान में काम करने वाले मजदूरों को पेमेंट देने में भी समस्या हो रही है। वह तो हल्की-हल्की बारिश हुई है जिससे थोड़ा सुधार आ रहा है। वहीं किसान शंभू राय का कहना है कि इस बार एक तो फसल कम हुई ऊपर से जो माल हम लोग भेजते हैं उसका क्या दाम वहा मिलता है यह भी हमें पता नहीं चल पाता है। व्यापारी का कहना है कि माल जला हुआ है इसलिए रेट कम मिलेगा। वहीं 24 टन के रेलवे पार्सल में मुजफ्फरपुर से 1100 पेटी शाही लीची भेजी गई है। इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि लीची की पैदावार कितनी कम हुई है।
एक किसान ने बताया कि जिले में हर साल एक लाख टन की पैदावार होती है, लेकिन इस साल मौसम की मार से 20 टन ही लीची बची है। इसमें भी फल का साइज छोटा होने के साथ मिठास भी कम है। लीची में लाली भी कम है जिस कारण किसानों को दूसरे राज्यों में शाही लीची की अधिक कीमत नहीं मिल रही है। भारी नुकसान से सहमे किसान आधे पके और कमजोर क्वालिटी की लीची बेचने और दूसरे प्रदेश भेजने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं मुजफ्फरपुर की तुलना में पश्चिम बंगाल की शाही लीची पुणे व मुंबई सहित अन्य राज्यों में अधिक कीमत पर बिक रही है। मुजफ्फरपुर की शाही लीची 1200-1300 रुपए और पश्चिम बंगाल की लीची 2000-2100 रुपए पेटी बिक रही है। कम कीमत मिलने से आर्थिक रुप से किसानों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

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