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हिमाचल प्रदेश उपचुनाव: राजनीतिक दलों के लिए उभरती चुनौतियां

हिमाचल प्रदेश के आगामी उपचुनाव में, राजनीतिक दिग्गज रामलाल मारकंडा और राकेश चौधरी ने भाजपा और कांग्रेस के लिए नई चुनौतियां पेश की हैं। लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने रवि ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़ी है। इस निर्णय से असंतुष्ट, पूर्व मंत्री मारकंडा ने अब कांग्रेस से भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है। धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में, चौधरी के समर्थकों ने कांग्रेस से टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने देवेंद्र जग्गी को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। इससे चौधरी के समर्थकों ने उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी दी है।

दोनों नेताओं के निर्दलीय चुनाव में उतरने से दोनों प्रमुख पार्टियों के वोट बंट सकते हैं, जिससे उपचुनाव में उनके लिए नुकसान की संभावना है। रवि ठाकुर सहित छह कांग्रेस विधायकों के बागी होने के बाद इन सीटों पर उपचुनाव आवश्यक हो गए हैं। वर्ष 2022 में, ठाकुर ने कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ा और मंत्री मारकंडा को हराया, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

धर्मशाला उपचुनाव में, कांग्रेस ने जग्गी को उम्मीदवार बनाया है, जो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पसंद और पार्टी सर्वे में शीर्ष पर थे। भाजपा ने इस सीट पर वीरभद्र सरकार के पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा को उम्मीदवार बनाया है।

चुनावी माहौल में, कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने नेताओं को मनाने और एकजुटता बनाए रखने की कोशिश की है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि वे चुनाव में सभी को साथ लेकर चलेंगे, जबकि भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा ने कहा कि अगर नेता नहीं मानते हैं, तो उन्हें मौकापरस्त कहा जाएगा।

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