
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की लाइन क्षमता को बढ़ाने और रेल नेटवर्क को और अधिक कुशल बनाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने चार महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का लक्ष्य यात्री और मालगाड़ियों के निर्बाध और तेज़ परिवहन को सुनिश्चित करना है, जिससे रेलवे की कार्यक्षमता और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यापक सुधार होगा।
परियोजनाओं के लाभ
यात्री और माल परिवहन में तेजी: अधिक ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवृत्ति और गति में वृद्धि होगी।
लॉजिस्टिक लागत में कमी: कुशल रेलवे संचालन से माल ढुलाई की लागत कम होगी, जिससे व्यापार और उद्योग को लाभ मिलेगा।
तेल आयात में कमी: रेल परिवहन को अधिक कुशल बनाने से डीजल और अन्य ईंधनों की खपत कम होगी।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में कमी: टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जाएगा।
मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का उद्देश्य
इन परियोजनाओं के तहत कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। इससे माल परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुव्यवस्थित होगी। इन सुधारों का सीधा लाभ औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक विकास को मिलेगा।
परियोजनाओं की कुल लागत और समयसीमा
कुल अनुमानित लागत: ₹18,658 करोड़
परियोजनाओं की पूर्णता: वित्तीय वर्ष 2030-31 तक सभी कार्य पूरे होने की योजना है।
रोजगार सृजन पर प्रभाव
इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान लगभग 379 लाख मानव-दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
भारतीय रेलवे में इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं की मंजूरी से भारत की लॉजिस्टिक क्षमताओं में ऐतिहासिक सुधार होगा। इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी, यात्रा अनुभव बेहतर होगा और रेलवे का पर्यावरणीय प्रभाव घटेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।





